छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: मीसाबंदियों को फिर मिलेगी पेंशन, विधेयक पारित
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने मीसाबंदियों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए उनकी सम्मान निधि को फिर से बहाल कर दिया है। इसे कानूनी रूप देकर सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में कोई भी सरकार इसे बंद नहीं कर सकेगी।
क्या है फैसला?
आपातकाल (1975) के दौरान जेल में रहे मीसबंदियों को फिर से पेंशन मिलेगी।
कांग्रेस सरकार ने 2019 में इसे बंद कर दिया था, जिसे अब बीजेपी सरकार ने दोबारा शुरू किया है।
पिछले 5 वर्षों की पेंशन भी एकमुश्त दी जाएगी।
विधेयक पास होने के बाद अब कोई सरकार इसे रद्द या बंद नहीं कर सकेगी।
इस योजना को मध्य प्रदेश की तर्ज पर कानूनी सुरक्षा दी गई है।
कौन हैं मीसाबंदी?
25 जून 1975 को लागू आपातकाल के दौरान मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) कानून के तहत हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था। विरोध करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना सुनवाई के जेल भेजा गया। इन्हीं लोगों को मीसाबंदी कहा जाता है।
कितनी मिलेगी पेंशन?
तीन श्रेणियों में 10,000 से 25,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में करीब 350 मीसाबंदी लाभान्वित होंगे।
रमन सरकार में यह योजना 2008 में शुरू हुई थी, लेकिन 2019 में कांग्रेस सरकार ने इसे बंद कर दिया था।
भूपेश सरकार ने क्यों रोकी थी पेंशन?
2019 में कांग्रेस सरकार ने इसे ‘अनुचित लाभ’ बताते हुए बंद कर दिया था।
कांग्रेस का तर्क था कि इसमें राजनीतिक लोगों को फायदा दिया जा रहा था।
बीजेपी ने चुनावी घोषणा पत्र में इसे फिर से शुरू करने का वादा किया था।
अब सरकार ने इसे कानूनी संरक्षण देकर स्थायी बना दिया है।
भविष्य में कोई सरकार नहीं रोक सकेगी
इस विधेयक के पारित होने के बाद अब किसी भी सरकार को इसे रोकने का अधिकार नहीं होगा। यह फैसला लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और बलिदान को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला लोकतंत्र सेनानियों के लिए ऐतिहासिक और बड़ा सम्मान माना जा रहा है।
