बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जीएसटी विभाग की कार्रवाई को बताया गैरकानूनी, फर्म का बैंक खाता डी-फ्रीज करने का आदेश
बिलासपुर। जीएसटी विभाग को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को अनुचित मानते हुए एक व्यवसायिक फर्म का बैंक खाता डी-फ्रीज करने का निर्देश दिया है। यह मामला सक्ती जिले के बाराद्वार क्षेत्र में स्थित "इंडियन ट्रेड एंड ट्रांसपोर्ट कंपनी" से जुड़ा है, जो मुख्य रूप से ट्रेडिंग कार्य में संलग्न है।
दरअसल, विभाग ने फर्म के खिलाफ जीएसटी अधिनियम की धारा 73 के तहत नोटिस जारी कर वर्ष 2017-18 के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में अनियमितता का आरोप लगाया। इसके आधार पर दिसंबर 2023 में टैक्स, ब्याज और अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया गया और प्रोपराइटर के व्यक्तिगत बचत खाते को फ्रीज कर दिया गया।
इस कार्रवाई के खिलाफ फर्म ने पहले जीएसटी आयुक्त के समक्ष अपील की, जिसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
याचिका में यह तर्क दिया गया कि जीएसटी अधिनियम की धारा 73 के अनुसार, कर पुनर्निर्धारण की अधिकतम समय सीमा तीन वर्ष है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में जीएसटी काउंसिल या सीबीडीटी द्वारा ही बढ़ाया जा सकता है। इस मामले में कोई वैध विस्तार नहीं हुआ, इसलिए विभाग की कार्रवाई विधि विरुद्ध है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता फर्म ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर सकती है, साथ ही फर्म के प्रोपराइटर का बैंक खाता तत्काल प्रभाव से डी-फ्रीज किया जाए, जिससे उसका संचालन सामान्य रूप से हो सके।
इस फैसले को व्यवसायिक जगत के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानूनी प्रक्रिया और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है।
