बिलासपुर न्यूज रिपोर्ट | 16 जून से स्कूल खुलने से पहले बसों की जांच में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल


 

बिलासपुर, 12 जून 2025 — आगामी 16 जून से छत्तीसगढ़ में स्कूलों के खुलने की तैयारी जोरों पर है, लेकिन स्कूल बसों की फिटनेस जांच में लापरवाही उजागर हो रही है। बिलासपुर में ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को पुलिस लाइन में करीब 200 स्कूल बसों की जांच की, लेकिन पूरी प्रक्रिया एक औपचारिकता बनकर रह गई।

जांच प्रक्रिया पर सवाल तब उठे जब यह सामने आया कि टीम ने महज एक-एक मिनट में हर बस को फिट या अनफिट घोषित कर दिया। सुबह 11:15 बजे से दोपहर 1 बजे तक कुल 160 मिनट में 200 से अधिक बसों की जांच कर ली गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 16 बिंदुओं की जांच में ही प्रति बस 10 से 15 मिनट लगने चाहिए।

अधूरे दस्तावेज और फिटनेस प्रमाण पत्र

जांच के दौरान अधिकांश बस ड्राइवर अधूरे दस्तावेज लेकर पहुंचे थे। कुछ के पास फिटनेस प्रमाण पत्र तो था, लेकिन वह एक्सपायर हो चुका था। कई बसों के पास बीमा दस्तावेज, परमिट या प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) ही नहीं थे। कुछ बसों में फायर एक्सटिंगुइशर और सीसीटीवी की व्यवस्था निष्क्रिय पाई गई।

फिर भी ज्यादातर बसों को जांच में पास कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने पहले से मौजूद प्रमाण पत्रों के आधार पर बसों को फिट घोषित कर दिया, जबकि मौके पर किसी भी दस्तावेज की गहराई से जांच नहीं की गई।

स्वास्थ्य विभाग की भी आधी अधूरी तैयारी

स्वास्थ्य विभाग ने ड्राइवर और हेल्परों की केवल ब्लड प्रेशर और शुगर जांच की। आंखों और कानों की जांच, जो कि वाहन चालक के लिए सबसे आवश्यक होती है, उसे नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजा यह रहा कि कई ड्राइवर हेल्पर जांच अधूरी पाकर मौके से लौट गए।

विशेषज्ञों के अनुसार ड्राइवर की नजर कमजोर होने पर वह ट्रैफिक सिग्नल के रंगों को सही ढंग से नहीं पहचान सकता। वहीं सुनने की शक्ति कम होने पर हॉर्न या वाहन की अन्य चेतावनियां नहीं सुन पाता, जिससे गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है।

अधिकारी बोले - दी चेतावनी, होगी सख्त कार्रवाई

एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। उन्होंने दावा किया कि बस संचालकों को सभी दस्तावेजों को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं और खामियों को जल्द सुधारने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि यदि तय मियाद में कमियां दूर नहीं की गईं तो संबंधित बसों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

स्कूल खुलने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन जिस तरह से जांच प्रक्रिया महज औपचारिक बनकर रह गई है, वह बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। अगर बिना पर्याप्त जांच के बसों को फिट घोषित कर दिया गया तो आने वाले दिनों में सड़क हादसों की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

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