"कॉन्स्टेबल ने नाबालिग के साथ किया बलात्कार: पीड़िता ने बताया - 'मारपीट कर मुंह दबाया, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई एफआईआर'"


                                                                 आरोपी सिपाही विवेक पोद्दार।
 

दुर्ग/भिलाई: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा नाबालिग लड़की से बलात्कार का मामला सामने आया है। आरोपी कॉन्स्टेबल विवेक पोद्दार के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसके बाद वह फरार हो गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीम बनाई है और कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

घटना की जानकारी

आरोप है कि विवेक पोद्दार ने 2021 में नाबालिग पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया। जब पीड़िता ने शोर मचाने की कोशिश की, तो उसके कपड़े फाड़ दिए और मुंह दबाकर धमकाया। घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिवार को बताया, लेकिन उसे डांटकर चुप करा दिया गया। आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी।

परिवार ने नहीं दिया साथ, पीड़िता ने की शादी

पीड़िता ने बताया कि उसकी मां और भाई ने उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और आरोपी को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जब वह बालिग हो जाएगी, तो उसकी शादी करा देंगे। मजबूर होकर पीड़िता ने 2023 में अपने मोहल्ले के एक युवक से शादी कर ली।

झूठा केस दर्ज कराने का आरोप

आरोप है कि पीड़िता की मां ने विवेक पोद्दार को बचाने के लिए छावनी थाने में झूठी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पीड़िता के पति और एक अन्य युवक पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया गया। हालांकि, पीड़िता ने अपना जन्म प्रमाण पत्र पेश कर साबित किया कि वह उस समय बालिग थी और अपनी मर्जी से शादी की थी।

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड

विवेक पोद्दार पहले भी विवादों में रहा है। 2024 में उस पर एक व्यक्ति को फंसाने के लिए उसकी गाड़ी में गांजा और पिस्टल रखने का आरोप लगा था। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया था।

पुलिस की कार्रवाई

दुर्ग पुलिस ने बताया कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए टीम लगाई गई है। एएसपी पद्मश्री तंवर ने कहा कि मामला गंभीर है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

इस घटना पर स्थानीय महिला संगठनों ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर पीड़िता की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होती, तो उसे इतना लंबा संघर्ष नहीं करना पड़ता।

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग अपने ही एक अधिकारी के खिलाफ न्याय दिला पाएगा?

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