बिलासपुर जलभराव संकट: दो घंटे की बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, शहर बना तालाब


 

बिलासपुर में लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 10 जुलाई को दो घंटे की तेज बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। हालात इतने खराब रहे कि कलेक्टर बंगले से लेकर SDM कोर्ट तक पानी भर गया। कोर्ट परिसर में जलभराव के कारण सुनवाई तक प्रभावित हुई। जज, निगम कमिश्नर, संभागीय कमिश्नर समेत कई अफसरों के बंगलों में पानी घुस गया।

सरकारी दफ्तरों में पानी, अफसर भी परेशान

बारिश के चलते SDM दफ्तर, आदिवासी विकास विभाग का हॉस्टल और कई दुकानों में भी पानी भर गया। गंदे नाले का पानी घुसने से लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। अफसर भी इस बार खुद संकट में फंस गए। आनन-फानन में मड पंप मंगवाकर घंटों मशक्कत के बाद पानी निकाला गया, तब जाकर हालात कुछ सामान्य हो सके।

रिहायशी कॉलोनियां भी जलमग्न, घरों में घुसे पानी ने मचाई तबाही

शहर के कई पुराने जलभराव वाले इलाकों के साथ इस बार पॉश कॉलोनियों की भी हालत खराब रही। श्रीकांत वर्मा मार्ग, बंधवापारा, कोतवाली चौक, सरकंडा, सिम्स चौक के साथ-साथ मीना बाजार, पारिजात, गया विहार, गुरु विहार जैसे रिहायशी इलाकों में भी घुटनों तक पानी भर गया।

लोग अपने घरों में कैद रहे। फर्नीचर, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसोई के सामान पानी में डूब गए। जरहाभाठा, ओम नगर, अज्ञेय नगर, भारतीय नगर जैसे इलाकों में लोगों को बारिश के थमने के बाद भी तीन-तीन घंटे तक पानी निकालना पड़ा।

कोर्ट रूम तक पहुंचा पानी, सरकारी दफ्तरों में भी तबाही

बारिश के समय SDM मनीष साहू खुद सुनवाई कर रहे थे, लेकिन जब कोर्ट रूम तक पानी पहुंच गया तो काम रोकना पड़ा। कोर्ट कैंपस तालाब में तब्दील हो गया था। कर्मचारी फाइलें बचाने में जुटे रहे।

योजनाओं की पोल खुली, हर गली-मोहल्ले में पानी

नगर निगम पहले ही 27 जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हांकित कर चुका था, लेकिन बारिश ने इस योजना की पोल खोल दी। इस बार ऐसे इलाके भी डूब गए, जिन्हें पहले सुरक्षित माना जाता था। हर रोज नए मोहल्लों में पानी भरने की खबरें आ रही हैं। सड़कों पर बहते पानी से ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा, कई वाहन पानी में फंस गए।

प्रशासन की लापरवाही उजागर, स्थायी समाधान अब भी दूर

हर साल निगम बजट में करोड़ों खर्च करने के दावे होते हैं, मगर हकीकत में नालियां चोक या अधूरी निकलीं। बारिश के बाद भी निगम सिर्फ मड पंप लगाकर पानी निकालने तक सीमित रहा। अधिकारियों ने फिर से सफाई का दावा किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या अगली बारिश में हालात बदलेंगे? या फिर शहर हर बार इसी तरह पानी में डूबेगा?

लोगों में आक्रोश, प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल

स्थानीय लोग निगम की लापरवाही से बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि केवल बरसात में ही दिखावे के इंतजाम किए जाते हैं, बाकी साल नालों की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता। इस बार शहर की हर गली में पानी ने ये साफ कर दिया कि व्यवस्था सिर्फ कागजों पर है, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

एक नजर में प्रभावित इलाके:

  • श्रीकांत वर्मा मार्ग

  • सरकंडा

  • बंधवापारा

  • सिम्स चौक

  • कोतवाली चौक

  • मीना बाजार

  • पारिजात कॉलोनी

  • गया विहार

  • गुरु विहार

  • अज्ञेय नगर

  • भारतीय नगर

  • जरहाभाठा

  • ओम नगर

सवाल यही है—क्या प्रशासन अगली बारिश तक जागेगा?

Post a Comment

Previous Post Next Post