8 महीने बाद भी खाली हाथ: चोरी के बाद थाने और SP ऑफिस के चक्कर लगा रहा दंपती


 

दुर्ग जिले के नंदिनी थाना क्षेत्र में आठ महीने पहले हुई एक बड़ी चोरी की घटना आज भी अनसुलझी है। चोरी के शिकार पीड़ित दंपती न्याय की आस में थाना, एसपी कार्यालय और उच्च अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला है। यह मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

चोरी की वारदात और FIR का विरोधाभास

यह मामला 3 अक्टूबर 2024 का है, जब नंदिनी थाना क्षेत्र स्थित हरीश वर्मा के घर अज्ञात चोरों ने धावा बोला था। वारदात उस समय हुई जब घर के सदस्य बाहर गए हुए थे। चोर घर के पिछले हिस्से से घुसकर अलमारी में रखे गहनों और नकदी पर हाथ साफ कर गए। हरीश वर्मा के अनुसार, चोरी गई संपत्ति की कुल कीमत 15 लाख रुपये से अधिक थी, जिसमें सोने-चांदी के बहुमूल्य गहने और नकद राशि शामिल थी।

हालांकि, पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में चोरी की कुल राशि मात्र डेढ़ लाख रुपये दर्शाई गई, जिसे लेकर पीड़ित परिवार ने आपत्ति जताई है। हरीश वर्मा का कहना है कि उन्होंने सभी प्रमाण पुलिस को उपलब्ध कराए, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

आठ महीने से इंसाफ की तलाश

पीड़ित दंपती ने चोरी की घटना के बाद से लेकर अब तक थाना प्रभारी, एसपी, एडिशनल एसपी और यहां तक कि आईजी कार्यालय तक शिकायत की, लेकिन उन्हें हर जगह सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया गया। न तो अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही चोरी गया माल बरामद हो पाया है।

हरीश वर्मा ने बताया, “हमने हर स्तर पर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हमारी पीड़ा को अनसुना किया गया। आठ महीने बीत चुके हैं और हमें अब तक इंसाफ नहीं मिला है।”

पुलिस की जांच और बयान

इस मामले को लेकर धमधा एसडीओपी अलेक्जेंडर किरो ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। हालांकि, यह दावा भी महज आश्वासन बनकर रह गया है, क्योंकि इतने लंबे समय बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा है।

जनता में नाराजगी और भरोसे की कमी

इस घटना ने आम नागरिकों के मन में कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को लेकर अविश्वास की भावना पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी चोरी के मामले में भी कार्रवाई नहीं होती है, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा?

नंदिनी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश साहू का कहना है, “पुलिस का रवैया बहुत ही निराशाजनक है। पीड़ित परिवार न्याय की आस में दर-दर भटक रहा है और अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। इससे अपराधियों के हौसले और बुलंद हो सकते हैं।”

जरूरत है न्यायिक हस्तक्षेप की

अब जब पुलिस जांच में कोई विशेष प्रगति नहीं हो रही है, तो यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप का भी विषय बनता जा रहा है। यदि उच्च न्यायालय या मानवाधिकार आयोग इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हैं, तो पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने की संभावना बन सकती है।


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