स्पताल में बाउंसर की गुंडागर्दी: पत्रकारों से मारपीट और पिस्टल से धमकी


 

रायपुर, छत्तीसगढ़ – राजधानी स्थित अंबेडकर अस्पताल में रविवार रात उस समय हड़कंप मच गया जब अस्पताल के भीतर तैनात बाउंसरों ने कुछ पत्रकारों पर हमला कर दिया। इस घटना में पत्रकारों को न केवल शारीरिक चोटें आईं बल्कि उनकी पेशेवर गरिमा को भी ठेस पहुंची। घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति पिस्टल लहराते हुए पत्रकारों को धमकाता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि पिस्टल लेकर आया शख्स वसीम नामक व्यक्ति है, जो कथित रूप से बाउंसरों से जुड़ा हुआ है।

पत्रकार कवरेज करने पहुंचे थे अस्पताल

रविवार रात कुछ पत्रकार एक मेडिकल लापरवाही की खबर की जानकारी लेने अंबेडकर अस्पताल पहुंचे थे। इसी दौरान अस्पताल में तैनात बाउंसरों ने पत्रकारों को पहले अंदर घुसने से रोका और फिर विवाद बढ़ने पर उन पर हमला कर दिया। बाउंसरों की आक्रामकता इस हद तक पहुंच गई कि उन्होंने पत्रकारों को धक्का-मुक्की की, कैमरे तोड़ने की कोशिश की और गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए।

पिस्टल लेकर पहुंचा वसीम

हमले के कुछ देर बाद एक युवक, जिसकी पहचान वसीम के तौर पर हुई है, अस्पताल परिसर में पिस्टल लेकर आ धमका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वसीम ने पत्रकारों को खुलेआम धमकाया और कहा कि अगर उन्होंने रिपोर्टिंग की कोशिश की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह दृश्य CCTV कैमरों में कैद हुआ और वायरल होते ही पूरे राज्य में सनसनी फैल गई।

पुलिस और प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पत्रकारों का कहना है कि अस्पताल में बाउंसरों की मौजूदगी और उनके द्वारा की गई हिंसक हरकतें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला हैं। उन्होंने मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।

स्वास्थ्य मंत्री का कड़ा बयान

घटना की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्रीकांत तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
"जो लोग पत्रकारों पर हमला करते हैं, वे राज्य के कानून को चुनौती दे रहे हैं। चाहे वह वसीम हो या कोई और, ऐसे गुंडों को मिट्टी में मिला देंगे। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अस्पतालों को गुंडागर्दी का अड्डा नहीं बनने देंगे।"

उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है जो 48 घंटे में रिपोर्ट सौंपेगी।

बाउंसरों की तैनाती पर उठे सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब अंबेडकर अस्पताल में बाउंसरों की हरकतों पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई बार मरीजों के परिजनों और मीडिया से अभद्रता की शिकायतें दर्ज की गई थीं। पत्रकारों का कहना है कि बाउंसरों की मौजूदगी सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा नहीं, बल्कि गुंडागर्दी फैलाने का जरिया बन गई है।

पत्रकार संगठनों का आंदोलन

घटना के विरोध में सोमवार को छत्तीसगढ़ पत्रकार संघ और प्रेस क्लब ने विरोध मार्च निकाला और मुख्यमंत्री से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 72 घंटे के भीतर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।


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