बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | 12 जून 2025:
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत टाटीधार और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत खनन में गंभीर सामाजिक और कानूनी उल्लंघन सामने आया है। यहां बैगा जनजाति के नाबालिग बच्चों से रेत ढुलाई और खनन में मजदूरी कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। यह खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शर्मा ने किया है, जिन्होंने इस गंभीर विषय की जानकारी जिला प्रशासन को दी है।
प्रदीप कुमार शर्मा का कहना है कि स्थानीय रेत ठेकेदार और ट्रैक्टर मालिक बच्चों को पैसों का लालच देकर उनसे खतरनाक और शारीरिक रूप से कठिन मजदूरी करा रहे हैं। यह न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि भारत के बालश्रम निषेध अधिनियम का भी खुला उल्लंघन है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगे:
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मजदूरी कर रहे बच्चों को अविलंब मुक्त कर स्कूल में दाखिल कराया जाए।
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बाल मजदूरी कराने वाले ठेकेदारों और ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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बैगा जनजाति के परिवारों को वैकल्पिक और सुरक्षित रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
क्या कहता है कानून?
भारत सरकार द्वारा पारित बालश्रम निषेध और विनियमन अधिनियम, 1986 के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना दंडनीय अपराध है। इसमें छह माह से दो साल तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान है। इसके अलावा यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का भी हनन माना जाता है, जो संविधान द्वारा संरक्षित हैं।
सामाजिक चिंता
बैगा जनजाति, जिसे भारत सरकार ने विशेष रूप से संरक्षित जनजातियों में शामिल किया है, पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में है। बच्चों से मजदूरी कराना न केवल उनके बचपन और शिक्षा को छीनता है, बल्कि एक पूरे समुदाय के विकास को भी बाधित करता है।
अब तक की कार्रवाई
प्रदीप शर्मा की शिकायत पर जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति द्वारा प्राथमिक जांच की बात कही गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि मामले की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर बाल संरक्षण और आदिवासी अधिकारों को लेकर शासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। जरूरत है कि प्रशासन न केवल तुरंत कार्रवाई करे, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान भी निकाले।
