महानदी में अवैध रेत उत्खनन: माफियाओं का काला कारोबार, प्रशासन मौन!
जांजगीर-चांपा। महानदी में जलस्तर कम होते ही रेत माफिया पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। नदी में जहां-जहां भी रेत के टापू बने हैं, वहीं से अवैध रूप से सैकड़ों ट्रिप रेत का उत्खनन किया जा रहा है। सरकार ने अवैध रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आ रही है।
शिवरीनारायण क्षेत्र में अवैध खनन चरम पर
शिवरीनारायण के तनौद, कमरीद समेत दर्जनों घाटों पर रेत का अवैध खनन जोरों पर है। वहीं, सक्ती जिले के करही और किकिरदा इलाकों में भी यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है। इन क्षेत्रों में खनिज विभाग की लापरवाही और मिलीभगत के चलते माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं।
करोड़ों का अवैध व्यापार
महानदी में जलस्तर कम होने से रेत के टापू उभर आए हैं, जो माफियाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं। हाईवा और ट्रैक्टरों के माध्यम से सैकड़ों ट्रिप रेत निकाली जा रही है। यदि सरकार इस पर रॉयल्टी वसूलती तो हर दिन लाखों का राजस्व प्राप्त हो सकता था, लेकिन प्रशासन की नाकामी से सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हर दिन 10 लाख रुपये का कारोबार
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये की रेत का अवैध व्यापार किया जा रहा है। एक ट्रैक्टर से डेढ़ से दो हजार रुपये और हाईवा से चार से पांच हजार रुपये की वसूली की जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे खनन को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती नहीं दिखाई जा रही, जिससे खनिज अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
लंबी कतारों में खड़े ट्रैक्टर
महानदी लगभग एक किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत हिस्से में ही पानी बह रहा है। शेष भाग रेत के टापू में तब्दील हो चुका है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए माफियाओं ने पंचायत स्तर तक सांठगांठ कर रेत निकालने का काम तेज कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग रही हैं और माफिया बिना किसी डर के खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं।
हसदेव नदी में भी अवैध खनन जोरों पर
जिले के हसदेव नदी के भादा और दहिदा क्षेत्र में भी यही स्थिति बनी हुई है। यहां के सरपंचों की संलिप्तता भी उजागर हो रही है। बताया जा रहा है कि ये सरपंच मंत्रियों से संपर्क कर खनिज अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं, जिससे अवैध खनन बेरोकटोक जारी रहता है। रात के समय चेन माउंटेन मशीन से रेत की खुदाई कर, दिन में इन मशीनों को झाड़ियों में छिपा दिया जाता है।
प्रशासन का दावा, कार्रवाई जारी
प्रशासन का कहना है कि जहां भी शिकायत मिलती है, वहां टीम भेजकर कार्रवाई की जाती है। रात में भी छापेमारी की जा रही है और अवैध कारोबार से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए हैं। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत यह है कि रेत माफिया बेखौफ होकर अपने काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं और प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
महानदी में अवैध रेत उत्खनन: माफियाओं का काला कारोबार, प्रशासन मौन!
जांजगीर-चांपा।
महानदी में जलस्तर कम होते ही रेत माफिया पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। नदी में जहां-जहां भी रेत के टापू बने हैं, वहीं से अवैध रूप से सैकड़ों ट्रिप रेत का उत्खनन किया जा रहा है। सरकार ने अवैध रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आ रही है।
शिवरीनारायण क्षेत्र में अवैध खनन चरम पर
शिवरीनारायण के तनौद, कमरीद समेत दर्जनों घाटों पर रेत का अवैध खनन जोरों पर है। वहीं, सक्ती जिले के करही और किकिरदा इलाकों में भी यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है। इन क्षेत्रों में खनिज विभाग की लापरवाही और मिलीभगत के चलते माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं।
करोड़ों का अवैध व्यापार
महानदी में जलस्तर कम होने से रेत के टापू उभर आए हैं, जो माफियाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं। हाईवा और ट्रैक्टरों के माध्यम से सैकड़ों ट्रिप रेत निकाली जा रही है। यदि सरकार इस पर रॉयल्टी वसूलती तो हर दिन लाखों का राजस्व प्राप्त हो सकता था, लेकिन प्रशासन की नाकामी से सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हर दिन 10 लाख रुपये का कारोबार
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये की रेत का अवैध व्यापार किया जा रहा है। एक ट्रैक्टर से डेढ़ से दो हजार रुपये और हाईवा से चार से पांच हजार रुपये की वसूली की जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे खनन को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती नहीं दिखाई जा रही, जिससे खनिज अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
लंबी कतारों में खड़े ट्रैक्टर
महानदी लगभग एक किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत हिस्से में ही पानी बह रहा है। शेष भाग रेत के टापू में तब्दील हो चुका है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए माफियाओं ने पंचायत स्तर तक सांठगांठ कर रेत निकालने का काम तेज कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग रही हैं और माफिया बिना किसी डर के खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं।
हसदेव नदी में भी अवैध खनन जोरों पर
जिले के हसदेव नदी के भादा और दहिदा क्षेत्र में भी यही स्थिति बनी हुई है। यहां के सरपंचों की संलिप्तता भी उजागर हो रही है। बताया जा रहा है कि ये सरपंच मंत्रियों से संपर्क कर खनिज अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं, जिससे अवैध खनन बेरोकटोक जारी रहता है। रात के समय चेन माउंटेन मशीन से रेत की खुदाई कर, दिन में इन मशीनों को झाड़ियों में छिपा दिया जाता है।
प्रशासन का दावा, कार्रवाई जारी
प्रशासन का कहना है कि जहां भी शिकायत मिलती है, वहां टीम भेजकर कार्रवाई की जाती है। रात में भी छापेमारी की जा रही है और अवैध कारोबार से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए हैं। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत यह है कि रेत माफिया बेखौफ होकर अपने काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं और प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
अवैध रेत खनन से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। स्थानीय लोग इस काले कारोबार के खिलाफ प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर कब तक अंकुश लगा पाते हैं।
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