लोकमाता अहिल्यादेवी: राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने वाली महान विभूति
रायपुर। भारत की पवित्र भूमि ने समय-समय पर अनेक महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिन्होंने समाज को दिशा देने का कार्य किया। इन्हीं में से एक थीं लोकमाता अहिल्यादेवी होल्कर, जिनका जीवन साहस, प्रशासनिक कुशलता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने सोमवार को रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित लोकमाता अहिल्यादेवी त्रिशताब्दी जयंती समारोह में उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
अभयम: साहस की प्रतिमूर्ति
लोकमाता अहिल्यादेवी का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना अदम्य साहस से किया। उनका राज्य अत्यंत विस्तृत था और कई बार उन्हें विद्रोहों का सामना करना पड़ा, परंतु अपनी अद्वितीय सैन्य कुशलता के बल पर उन्होंने स्थायी समाधान निकाले। उनका नेतृत्व संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने वाला था।
प्रशासनिक कुशलता और न्यायप्रियता
रामदत्त चक्रधर ने उनके प्रशासनिक गुणों पर चर्चा करते हुए बताया कि उनके परिवार में अनेक दुर्घटनाएँ हुईं, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में कभी कोई शिथिलता नहीं आने दी।
नासिक में एक निर्माण कार्य में आर्थिक अनियमितता की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारी को पद से हटा दिया।
पंढ़रपुर में निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए हाथियों को निर्माण स्थल पर चलवाया।
उनके राज्य में निर्धनों की रक्षा के लिए कठोर नियम थे, जिससे कोई भी धनवान व्यक्ति गरीबों को प्रताड़ित नहीं कर सकता था।
उनका मानना था कि जनता और शासक का संबंध मां और संतान की तरह होना चाहिए।
स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा
महेश्वर में स्वदेशी उद्योगों की स्थापना कर उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता को बल दिया।
आध्यात्मिकता और धर्म रक्षा
अहिल्यादेवी का जीवन धर्मपरायणता का प्रतीक था। उनके चित्रों में उनके हाथों में शिवलिंग देखा जा सकता है। उन्होंने काशी, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गया सहित अनेकों स्थानों पर मंदिरों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार करवाया। पंढ़रपुर में यात्रियों के लिए भोजन व्यवस्था करवाई और सनातन मूल्यों का पालन किया।
भारत के स्वर्णिम युग में उनकी प्रेरणा
रामदत्त चक्रधर ने कहा कि भारत का वर्तमान काल स्वर्णिम युग है, जिसमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रम घटित हो रहे हैं। यह वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष भी है। ऐसे समय में लोकमाता अहिल्यादेवी के जीवन से प्रेरणा लेना अत्यंत आवश्यक है।
विशेष आयोजन और जनभागीदारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा ने बताया कि त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ प्रांत के 1157 शिक्षण संस्थानों में व्याख्यानमालाएँ, निबंध प्रतियोगिताएँ एवं रंगोली निर्माण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन
इस अवसर पर कलाकारों द्वारा एक भव्य नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों को लोकमाता के जीवन से जोड़ा। कार्यक्रम में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद शुक्ल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक अभयराम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंदेल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
लोकमाता अहिल्यादेवी का जीवन त्याग, साहस और प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण है, जिससे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरणा लेनी चाहिए।
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