# 📰 छत्तीसगढ़ में हलचल: आरक्षण बिल पर जल्द फैसले की मांग, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ा दबाव!

# 📰 छत्तीसगढ़ में हलचल: आरक्षण बिल पर जल्द फैसले की मांग, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ा दबाव!  

**रायपुर, 10 अप्रैल 2025**: सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसल ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नई जान फूंक दी है। लंबे समय से लटके 76% आरक्षण वाले विधेयक को लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने साफ कहा, **"अब और देरी नहीं चलेगी, लोगों को उनका हक तुरंत मिलना चाहिए!"** 



सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु मामले में बड़ा आदेश दिया कि राज्यपाल विधानसभा से पास बिलों को अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकते। इस फैसले का असर अब छत्तीसगढ़ में भी दिख रहा है, जहां **9 विधेयक** राजभवन और राष्ट्रपति भवन में अटके पड़े हैं। इनमें सबसे चर्चित है **आरक्षण संशोधन विधेयक**, जो 2022 में भूपेश बघेल सरकार ने पास किया था।  

## 🔥 आरक्षण बिल: क्या है मामला?  

2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने एक ऐतिहासिक बिल पास किया, जिसमें **76% आरक्षण** का प्रावधान था:  

- **अनुसूचित जनजाति (ST)**: 20% से बढ़ाकर **32%**  

- **अनुसूचित जाति (SC)**: **13%**  

- **अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)**: **27%**  

- **आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)**: **4%**  

लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी यह बिल राजभवन में धूल फांक रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि **बीजेपी की साजिश** के चलते अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और गरीब सवर्णों का हक छीना जा रहा है।  

दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा, **"बीजेपी सरकार और राज्यपाल हठधर्मिता छोड़ें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बताएं कि वे इस बिल पर हस्ताक्षर के लिए कब राजभवन जाएंगे?"*

## 🏛️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश  

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राज्यपाल के पास बिलों को रोकने का **'वीटो' जैसा कोई अधिकार नहीं** है। कोर्ट ने कहा:  

- **राज्यपाल को मंत्री परिषद की सलाह माननी होगी।**  

- बिलों को या तो **मंजूरी** देनी होगी या **पुनर्विचार** के लिए विधानसभा को वापस भेजना होगा।  

- किसी भी बिल को अनिश्चितकाल तक लटकाना **असंवैधानिक** है।  

इस फैसले ने छत्तीसगढ़ में उम्मीद की किरण जगाई है। लोग अब इंतजार कर रहे हैं कि राज्यपाल इन बिलों पर क्या कदम उठाते हैं।  

## 📜 9 बिलों का इंतजार, सियासत गर्म  

छत्तीसगढ़ में सिर्फ आरक्षण बिल ही नहीं, बल्कि **9 विधेयक** मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें कुछ प्रमुख बिल हैं:  

1. **धर्म स्वातंत्र्य विधेयक** (अजीत जोगी सरकार के समय का, अब भी राष्ट्रपति भवन में अटका)  

2. **कृषि कानून संशोधन** (भूपेश बघेल सरकार द्वारा केंद्र के कृषि कानूनों के जवाब में लाया गया)  

3. **कुलाधिपति संशोधन बिल** (विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए राज्यपाल के अधिकारों में कटौती)  

इन बिलों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी नोकझोंक रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक वर्ग का मुद्दा नहीं, बल्कि **सर्वसमाज का हक** है।  

## 💬 कांग्रेस की मांग, बीजेपी पर सवाल  

कांग्रेस ने बीजेपी से इस मुद्दे पर **स्पष्ट रुख** बताने को कहा है। दीपक बैज ने चेतावनी दी, **"अब और देरी अन्याय होगा। यह बिल सामाजिक न्याय का प्रतीक है, इसे और लटकाना जनता के साथ विश्वासघात है।"**  

वहीं, बीजेपी ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के दबाव में बीजेपी सरकार और राज्यपाल कोई ठोस कदम उठाएंगे?  

## 🌟 आगे क्या?  

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं। संभावना है कि:  

- बिलों को **मंजूरी** दी जाएगी।  

- या फिर **पुनर्विचार** के लिए विधानसभा को वापस भेजा जाएगा।  

अगर बिल वापस भेजे जाते हैं, तो सरकार संशोधन के बाद इन्हें दोबारा पास करवा सकती है। लेकिन जनता अब और इंतजार के मूड में नहीं है।  

**क्या छत्तीसगढ़ में जल्द ही आरक्षण बिल को मंजूरी मिलेगी?** यह सवाल अब हर किसी के मन में है।  

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