भगवा रंग में रंगा भिलाई, श्रीराम की भक्ति में डूबा जनसैलाब: झूमते-गाते हजारों रामभक्तों ने निकाली भव्य झांकी

भगवा रंग में रंगा भिलाई, श्रीराम की भक्ति में डूबा जनसैलाब: झूमते-गाते हजारों रामभक्तों ने निकाली भव्य झांकी

भिलाई। रामनवमी के पावन पर्व पर इस्पात नगरी भिलाई एक बार फिर श्रीराम की भक्ति में सराबोर हो गई। चारों दिशाओं से जय श्रीराम के गगनभेदी नारों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा ने शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया। भगवा पताकाओं से सजे मार्ग, रामधुन पर झूमते श्रद्धालु, और आकर्षक झांकियों की झलक ने हर किसी का मन मोह लिया।



पावर हाउस स्थित श्रीरामलीला मैदान इस आयोजन का मुख्य केंद्र बना, जहां हजारों श्रद्धालुओं की टोलियां पहुंचीं। श्रीराम जन्मोत्सव समिति द्वारा आयोजित यह महाआयोजन इस वर्ष अपने 40वें वर्ष में प्रवेश कर गया है — एक परंपरा, जो 1986 से निरंतर जारी है।

चारों दिशाओं से पहुंचे रामभक्त, झांकियों ने बटोरी वाहवाही

राम दरबार, बजरंगबली, राम-रावण युद्ध और श्रीराम के जीवन की प्रेरणादायक झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आधुनिक तकनीक से सजी लेजर लाइट शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और स्वचलित झांकियों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर झांकियों का स्वागत किया, बच्चे और युवा झूमते-गाते प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाते रहे।



राजनीतिक और सामाजिक गणमान्य भी हुए शामिल

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे, सांसद विजय बघेल सहित कई प्रमुख हस्तियों ने इस ऐतिहासिक आयोजन की शोभा बढ़ाई। प्रेमप्रकाश पांडे ने कहा, "यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली अद्भुत कड़ी है।"

डॉ. रमन सिंह ने कहा, "रामराज्य का आदर्श आज भी हमारे लिए प्रेरणा है, और ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव और भक्ति भाव को और मजबूत करते हैं।

एक मुठ्ठी अनाज’ अभियान बना प्रेरणा स्रोत

समिति के संरक्षक प्रेम प्रकाश पांडे ने आयोजन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे सामाजिक सहयोग से यह आयोजन एक जनआंदोलन बन चुका है। ‘एक मुठ्ठी अनाज’ अभियान के जरिए हजारों घरों से अनाज एकत्र कर महाप्रसाद तैयार किया गया, जिसे हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से ग्रहण किया।

भविष्य की झलक: संस्कृति, समर्पण और सततता

युवा विंग अध्यक्ष मनीष पांडे ने बताया कि 1150 से अधिक मंदिरों और संस्थाओं से जुड़े श्रद्धालु इस आयोजन का हिस्सा बने। उन्होंने इसे भिलाई की "सांस्कृतिक पहचान" बताया और आश्वस्त किया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और भी भव्य रूप लेगा।

श्रीराम की भक्ति में रंगा यह आयोजन न केवल आस्था का उत्सव था, बल्कि सामाजिक समरसता, संस्कृति और एकता का अनुपम उदाहरण बन गया। भिलाई की धरती पर रामराज्य की झलक देखते ही बनती थी।





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