फर्जी खातों से लोन घोटाला: 23.74 करोड़ की ठगी, 11 आरोपी गिरफ्तार


 

बलरामपुर जिले के कुसमी और शंकरगढ़ स्थित सहकारी बैंकों में 24 करोड़ रुपए के वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। इस बड़े घोटाले को बैंक के ही अफसरों और कर्मचारियों की साजिश के तहत अंजाम दिया गया। फर्जी खातों के ज़रिए किसानों के लोन की राशि निकालकर अफसरों ने सालों तक सरकारी योजनाओं को चूना लगाया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

12 साल से चल रहा था घोटाला

जांच में सामने आया है कि यह फर्जीवाड़ा पिछले 12 वर्षों से चला आ रहा था। अफसरों ने सरकारी विभागों और सहकारी समितियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोल रखे थे। इनमें किसानों के नाम पर जारी कर्ज की रकम को ट्रांसफर किया जाता था और फिर उसे निकाल लिया जाता था।
जांच में तीन बड़े खातों का खुलासा हुआ है:

  • जमड़ी सहकारी समिति के नाम पर ₹19.92 करोड़

  • जनपद पंचायत शंकरगढ़ के नाम से ₹91.57 लाख

  • नरेगा धनेशपुर के नाम से ₹3.19 करोड़

दस्तावेजों के फर्जी उपयोग से खोले गए खाते

अधिकारियों ने विभागों के आवेदन से मिले दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक ही कागजात पर दो-दो खाते खोल दिए थे। किसान लोन की रकम फर्जी खातों में ट्रांसफर होती रही। इससे यह संदेह भी मजबूत हुआ है कि इन फर्जी खातों के ज़रिए राज्य सरकार की कर्ज माफी योजना में भी करोड़ों की हेराफेरी की गई होगी।

नाबार्ड की जांच में लीपापोती

सूत्रों के मुताबिक जब घोटाले की शिकायत हुई तो नाबार्ड ने बैंक से रिपोर्ट मांगी, लेकिन अम्बिकापुर में बैठे उच्चाधिकारी जो खुद घोटाले में संलिप्त थे, उन्होंने बार-बार यह रिपोर्ट दी कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

ज्वेलरी शॉप में ट्रांसफर हुए पौने दो करोड़

जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुसमी सहकारी बैंक से अंबिकापुर की एक ज्वेलरी दुकान जमुना अलंकार को ₹1.82 करोड़ ट्रांसफर किए गए। यह राशि 52 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में भेजी गई, जिनमें से अधिकांश ट्रांजेक्शन के दस्तावेज और वाउचर उपलब्ध नहीं हैं। कई बार ये ट्रांजेक्शन बैंक मैनेजर अशोक सोनी द्वारा स्वयं किए गए।

साक्ष्य मिटाने की कोशिश, गुम वाउचर

कुसमी शाखा द्वारा जारी 386 वाउचर में से 275 वाउचर शाखा में नहीं मिले। जो वाउचर मिले, उनमें खाताधारकों के स्थान पर किसी और के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान दर्ज हैं। इससे यह भी साफ हुआ कि रकम निकालते समय दस्तावेजों में हेरफेर की गई थी।

गिरफ्तार अधिकारी और कर्मचारी

पुलिस ने इस घोटाले में संलिप्त 11 अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों में जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का प्रयोग), 120B (षड्यंत्र) और 34 (सामूहिक अपराध) के तहत केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपी हैं:

  • अशोक सोनी (सहायक मुख्य पर्यवेक्षक)

  • लक्ष्मण देवांगन (संस्था प्रबंधक)

  • विजय उइके (शाखा प्रबंधक, शंकरगढ़)

  • तबारक अली (प्रभारी क्लर्क)

  • राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय (प्रभारी अतिरिक्त प्रबंधक, अंबिकापुर)

  • सुदेश यादव (समिति सेवक, शंकरगढ़)

  • एतबल सिंह (सहायक मुख्य पर्ववेक्षक)

  • प्रकाश सिंह (कंप्यूटर ऑपरेटर, कुसमी)

  • जगदीश भगत (सहायक लेखापाल)

  • सबल राय (सहायक मुख्य पर्यवेक्षक व शाखा प्रबंधक, कुसमी)

  • विकास चंद्र पांडवी (वरिष्ठ पर्यवेक्षक)

आगे की जांच जारी, हजारों खातों की होगी समीक्षा

घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कुसमी और शंकरगढ़ शाखा में मौजूद 8 समितियों के कुल 13,636 खातों की विशेष जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला अभी सामने आए तथ्यों से भी बड़ा हो सकता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला सहकारी बैंक के सीईओ एसपी सिंह के अनुसार, "यह घोटाला सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि एक सुसंगठित आपराधिक साजिश है। इसमें और भी लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।"

कलेक्टर और सहकारी बैंक के प्राधिकृत अधिकारी विलास भोस्कर संदीपन की सख्ती के बाद ही यह मामला उजागर हुआ। पुलिस अब अन्य शाखाओं और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।


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