उत्तर बस्तर में सक्रिय नक्सली दंपती का तेलंगाना में सरेंडर, 25 लाख के इनामी गोपन्ना समेत पत्नी ने टेका हथियार


 

रायपुर/हैदराबाद। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे लगातार अभियान का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक बार फिर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति ने बड़ा परिणाम दिया है। उत्तर बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे एक नक्सली दंपती ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया है।

तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वालों में 25 लाख का इनामी डीकेएसजेडसीएम लच्छना उर्फ गोपन्ना और उसकी 8 लाख की इनामी डीवीसीएम पत्नी अंकुबाई शामिल हैं। यह सरेंडर बुधवार को तेलंगाना राज्य में हुआ।

जानकारी के अनुसार, नक्सली दंपती बीते 22 वर्षों से अलग-अलग क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। गोपन्ना वर्ष 2007 में उत्तर बस्तर क्षेत्र में नक्सल संगठन का हिस्सा बना था। उसे वर्ष 2023 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य बनाया गया था। वहीं उसकी पत्नी अंकुबाई ने भी लंबे समय तक संगठन में डीवीसीएम (डिवीजनल कमेटी मेंबर) के रूप में कार्य किया।

सरेंडर से मिल सकती हैं अहम जानकारियां

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े स्तर के नक्सलियों का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इन दोनों के पास से संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली, आंदोलन की रणनीति, कैडर की स्थिति और हथियारों की आपूर्ति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी मिल सकती है।

जनजागरूकता और दबाव का मिला असर

सूत्रों के मुताबिक नक्सली दंपती ने आत्मसमर्पण के पीछे अपनी उम्र, गिरते स्वास्थ्य और लगातार बढ़ते दबाव को मुख्य कारण बताया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा पुनर्वास नीति और समाज की मुख्यधारा में लौटने की पहल ने भी उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस और सरकार ने किया स्वागत

सरेंडर के बाद तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ना चाहता है, सरकार उसका पुनर्वास सुनिश्चित करेगी।

यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के पतन की दिशा में एक और ठोस संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा बलों का मानना है कि आने वाले समय में और भी बड़े नामों का समर्पण संभव है।



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