रामनवमी पर राजधानी में श्रद्धा और उल्लास: स्वर्णाभूषित भगवान श्रीराम, 1100 किलो मालपुए का भोग और भव्य आरती

रामनवमी पर राजधानी में श्रद्धा और उल्लास: स्वर्णाभूषित भगवान श्रीराम, 1100 किलो मालपुए का भोग और भव्य आरती

रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में रामनवमी का पर्व इस बार अद्भुत उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। राजधानी के प्रमुख मठों और मंदिरों में भगवान श्रीराम का दूध से अभिषेक कर स्वर्ण अलंकरण किया गया, जबकि मंदिरों को फूलों और लाइट्स से खूबसूरती से सजाया गया।



दूधाधारी और जैतूसाव मठ में विशेष आयोजन

200 साल पुराने जैतूसाव मठ में इस बार भी परंपरागत रूप से 1100 किलो मालपुए का भोग भगवान राम को अर्पित किया गया। दूधाधारी मठ में भी भव्य श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही दर्शन के लिए उमड़ पड़ी।

सीएम विष्णुदेव साय ने किए दर्शन

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी VIP रोड स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे और भगवान श्रीराम के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने अंजनी माता और बाल हनुमान मंदिर में भी पूजा की और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।



शोभायात्राओं और भंडारों से गूंजा शहर

शहर के विभिन्न क्षेत्रों से भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। VIP रोड के राम मंदिर में दिनभर रुद्राभिषेक, सवा मन भोग, भंडारा और महाआरती जैसे आयोजन हुए। शाम 7:30 बजे रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने रामनवमी के उत्सव को चरम पर पहुंचा दिया।

शंकराचार्य की उपस्थिति और आध्यात्मिक प्रवचन

पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती भी रायपुर पहुंचे और रावांभाठा स्थित सुदर्शन संस्थानम आश्रम में रामनवमी उत्सव में भाग लिया। वहीं इस्कॉन मंदिर में वृंदावन से मंगवाए गए वस्त्रों से भगवान राम का विशेष श्रृंगार किया गया।

महापाठ और व्याख्यान से गूंजा ऑडिटोरियम

जीई रोड स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में शाम को हनुमान चालीसा का महापाठ आयोजित किया गया, जहां पंडित विजय शंकर मेहता ने ‘मानव कल, आज और कल’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।




ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष रहा दिन

ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे ने बताया कि इस बार रामनवमी आठ शुभ योगों के संयोग में मनाई गई, जिसमें रवि पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि और श्रीवत्स जैसे दुर्लभ योग शामिल थे, जिससे यह दिन और अधिक पवित्र और फलदायी माना गया।



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