**बारसूर मड़ई मेला: 1600 साल पुरानी नागवंशी परंपरा आज भी जिंदा, कुलदेवी मणिकेश्वरी देवी को समर्पित ऐतिहासिक उत्सव**

 **बारसूर मड़ई मेला: 1600 साल पुरानी नागवंशी परंपरा आज भी जिंदा, कुलदेवी मणिकेश्वरी देवी को समर्पित ऐतिहासिक उत्सव**

**दंतेवाड़ा |** छत्तीसगढ़ के गीदम ब्लॉक के ऐतिहासिक नगर **बारसूर** में एक बार फिर **राजसी परंपराओं की गूंज** सुनाई देने वाली है। यहां 14 से 16 अप्रैल तक **तीन दिवसीय मड़ई मेला** का आयोजन किया जा रहा है, जो **छिंदक नागवंशी राजाओं की 1600 वर्षों पुरानी परंपरा** का जीवंत प्रतीक है।  

यह मेला न केवल श्रद्धा और भक्ति का केंद्र है, बल्कि **बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का गौरवशाली उत्सव** भी है।

**कुलदेवी मणिकेश्वरी (दंतेश्वरी) के चरणों में आस्था का सैलाब**

बारसूर, जो कभी छिंदक नागवंशी राजाओं की राजधानी थी, आज भी **उनकी कुलदेवी मावली मणिकेश्वरी (दंतेश्वरी)** के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। इस मेले में देवी के प्रति समर्पण, परंपरागत छत्र, लाट और देवगुड़ी के चिह्नों के साथ **सैकड़ों देवी-देवता** शामिल होते हैं।

हर एक देवता **अपने-अपने पुजारियों और सेवादारों** के साथ भव्य शोभायात्रा में भाग लेते हैं, जो राजसी ठाठ और बस्तर की गहरी आस्था को जीवंत कर देता है।

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 **सांस्कृतिक विरासत का उत्सव**

तीन दिनों तक माता **सोनादई मंदिर प्रांगण** में लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।  

- **लोक नृत्य**  

- **भजन-कीर्तन**  

- **पारंपरिक प्रस्तुतियां**  

स्थानीय कलाकार अपनी कला से भक्तों का मन मोह लेंगे और मेले को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर देंगे।

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 **समिति का समर्पण और प्रशासन से सहयोग की अपील**

**बस्तर देव सेवा समिति, बारसूर** के अध्यक्ष **जगत सिंह पुजारी** ने जानकारी दी कि सीमित संसाधनों के बावजूद समिति मेले को भव्य रूप देने का पूरा प्रयास कर रही है।  

उन्होंने शासन-प्रशासन से अपील की है कि **इतिहास और संस्कृति के इस प्रतीक मेले को संरक्षित रखने के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाए**, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस गौरवशाली परंपरा से जुड़ सकें।

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**श्रद्धा में डूबा बारसूर, माता से मनोकामना का विश्वास**

मेला सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि **मनोकामनाओं की पूर्ति का केंद्र** बन चुका है।  

भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार **माता को भेंट अर्पित करते हैं** और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

**तो इस 14 से 16 अप्रैल तक बारसूर आइए, परंपरा और आस्था के इस महासंगम का हिस्सा बनिए, और माता मणिकेश्वरी के दरबार में अपने जीवन को आशीर्वाद से भर लीजिए।**

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