दमोह से बिलासपुर तक मौत का सिलसिला: फर्जी डॉक्टर ने अपोलो में भी ली थी 8 जानें, अब CMHO ने मांगा जवाब

दमोह से बिलासपुर तक मौत का सिलसिला: फर्जी डॉक्टर ने अपोलो में भी ली थी 8 जानें, अब CMHO ने मांगा जवाब

मध्यप्रदेश के दमोह में फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम की करतूतों का पर्दाफाश होते ही एक और बड़ा खुलासा हुआ है। यह वही डॉक्टर है, जिसने पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल में भी इलाज के नाम पर कम से कम 8 लोगों की जान ले ली थी। इन मामलों में एक नाम पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का भी है, जिनका निधन साल 2006 में अपोलो में इलाज के दौरान हुआ था।



अपोलो अस्पताल को CMHO का नोटिस, डिग्री और नियुक्ति का आधार मांगा

बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. प्रमोद तिवारी ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए डॉक्टर नरेंद्र की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी सभी जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि इतने गंभीर पद पर कार्यरत डॉक्टर की नियुक्ति किस आधार पर की गई थी और 8 मरीजों की मौत के बावजूद क्या कार्रवाई की गई थी।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का मामला फिर चर्चा में

स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे प्रो. प्रदीप शुक्ल ने बताया कि अगस्त 2006 में उनके पिता को हार्ट प्रॉब्लम के चलते अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज की ज़िम्मेदारी डॉक्टर नरेंद्र पर थी। 2 अगस्त को एंजियोग्राफी के बाद आईसीयू में शिफ्ट किया गया और 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखने के बाद 20 अगस्त को उनकी मौत हो गई।

प्रदीप शुक्ल के अनुसार, बाद में पता चला कि डॉक्टर की डिग्री और रजिस्ट्रेशन फर्जी था। उस समय आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने भी इसकी पुष्टि की थी। हालांकि, अपोलो ने चुपचाप डॉक्टर को हटा दिया लेकिन कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं हुई।

डिग्रियों में गड़बड़झाला: नाम बदला, डिग्री फर्जी

डॉक्टर का असली नाम नरेंद्र विक्रमादित्य यादव है और वह देहरादून का रहने वाला है। लेकिन अस्पताल में उसने खुद को "नरेंद्र जॉन केम" बताया। उसके पास आंध्र प्रदेश से एमबीबीएस की एक डिग्री है, लेकिन बाद में जो MD और कार्डियोलॉजी की डिग्रियां पेश की गईं, वे कोलकाता, दार्जिलिंग और यूके की हैं—जिनका कोई पंजीकरण नंबर नहीं है।

दमोह में भी मौत का खेल: 7 मरीजों की गई जान

फरवरी 2025 में सामने आए ताजा मामले के अनुसार, डॉक्टर नरेंद्र ने दमोह के मिशन अस्पताल में ढाई महीने के भीतर 15 हार्ट ऑपरेशन किए, जिनमें 7 मरीजों की मौत हो गई। खुद को लंदन से शिक्षित कार्डियोलॉजिस्ट बताकर उसने मरीजों की जान से खिलवाड़ किया। घटना सामने आने के बाद डॉक्टर फरार हो गया है।

NHRC की नजर, कार्रवाई की मांग तेज

इस गंभीर प्रकरण पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। अब सवाल उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक सिस्टम की नजर से बचता रहा ये फर्जी डॉक्टर आखिर कितनी और जानों का जिम्मेदार है?

यह मामला न सिर्फ निजी अस्पतालों की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में मजबूत निगरानी प्रणाली की जरूरत को भी रेखांकित करता है।


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