छत्तीसगढ़: बर्खास्त B.Ed सहायक शिक्षकों का अनोखा विरोध—113 दिन से जारी आंदोलन, अब अंगारों पर चलकर जताया दुख
छत्तीसगढ़ में बर्खास्त किए गए B.Ed सहायक शिक्षक बीते 113 दिनों से अपनी बहाली और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। शनिवार रात आंदोलन ने एक बेहद भावुक मोड़ ले लिया, जब शिक्षकों ने सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए अंगारों पर चलकर प्रदर्शन किया।
महिला शिक्षिकाओं का दर्द—"सीता माता की तरह अग्निपरीक्षा"
इस दौरान कई महिला शिक्षिकाएं फूट-फूट कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि जैसे सतयुग में माता सीता को अपनी पवित्रता सिद्ध करने अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी, वैसे ही हम आज न्याय की मांग में अंगारों पर चलने को मजबूर हैं। शिक्षिकाओं ने हाथों में तख्तियां ली हुई थीं, जिन पर लिखा था—"सरकार बताए, निर्दोष शिक्षकों की गलती क्या है?"
सरकार से दो टूक—या समायोजन करो या इच्छा मृत्यु दो
शिक्षकों का कहना है कि वे शांति से अपनी बात कह रहे हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रही है। "हम गलत कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं। सरकार हमारी नौकरी लौटाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे।" एक शिक्षिका ने कहा।
113 दिन का संघर्ष—हर दिन नया रूप
इस आंदोलन की शुरुआत 14 दिसंबर 2024 को अंबिकापुर से रायपुर तक अनुनय यात्रा के रूप में हुई थी। 19 दिसंबर से यह आंदोलन राजधानी रायपुर के धरना स्थल में बदल गया। तब से अब तक आंदोलन कई बार भावनात्मक और प्रतीकात्मक रूप ले चुका है—
22 दिसंबर: धरना स्थल पर रक्तदान शिविर
26 दिसंबर: सामूहिक मुंडन
28 दिसंबर: यज्ञ-हवन
30 दिसंबर: जल सत्याग्रह
1 जनवरी: बीजेपी कार्यालय घेराव
3 जनवरी: उच्चस्तरीय प्रशासनिक समिति का गठन
6 जनवरी: वोट बहिष्कार की चेतावनी
10 जनवरी: NCTE की प्रतीकात्मक शवयात्रा
12 जनवरी: दंडवत यात्रा
18 जनवरी: मंत्री के बंगले का घेराव
20 जनवरी: चुनाव आचार संहिता के कारण आंदोलन स्थगन
सरकार से जवाब की प्रतीक्षा
शिक्षकों का कहना है कि सरकार द्वारा बनाई गई समिति की बैठक 4 अप्रैल को प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक उस पर कोई आधिकारिक अपडेट नहीं मिला है। शिक्षकों की मांग है कि या तो उन्हें फिर से सेवा में लिया जाए, या सरकार स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति बताए।
शिक्षकों की चेतावनी—अब संयम की सीमा पार हो रही है
आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि अगर सरकार जल्द फैसला नहीं लेती, तो वे अगला कदम उठाने को बाध्य होंगे। इस संघर्ष में अब भावना, श्रद्धा और आक्रोश सब कुछ झलकने लगा है। सरकार के सामने अब निर्णय लेने की घड़ी


