**कोरबा में कोयला मालगाड़ी हादसा: शारदा विहार के पास पटरी से उतरा डिब्बा, कोयला परिवहन ठप, फाटक पर हंगामा**

**कोरबा में कोयला मालगाड़ी हादसा: शारदा विहार के पास पटरी से उतरा डिब्बा, कोयला परिवहन ठप, फाटक पर हंगामा**

कोरबा में शनिवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जब मानिकपुर खदान से बालको जा रही कोयले से लदी मालगाड़ी का पांचवां डिब्बा शारदा विहार और टीपी नगर फाटक के बीच पटरी से उतर गया। डिब्बे का पहिया पटरी से हटकर कुछ दूरी तक घिसटता रहा, जिससे पटरी और पहिया दोनों को भारी नुकसान हुआ। इस घटना ने कोयले की सप्लाई रोक दी और शारदा विहार फाटक पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा। 


**कैसे हुआ हादसा?**  

घटना उस वक्त हुई जब मालगाड़ी बालको की दूसरी लाइन पर जा रही थी। चालक ने जैसे ही डिब्बे को पटरी से उतरते देखा, तुरंत गाड़ी रोक दी और रेलवे प्रबंधन को सूचना दी। मालगाड़ी फाटक के ठीक बीच में अटक गई, क्योंकि उस समय शारदा विहार फाटक बंद था। हादसे से रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा और कोयले का परिवहन पूरी तरह ठप हो गया। 

**फाटक पर भड़का लोगों का गुस्सा**  

मालगाड़ी के बीच फाटक में फंसने से दोनों तरफ लोगों की भीड़ जमा हो गई। शुरू में लोगों को हादसे की जानकारी नहीं थी, जिसके चलते उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। गेटमैन ने स्थिति स्पष्ट कर लोगों को शांत किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शारदा विहार फाटक पर मालगाड़ियों की आवाजाही के कारण फाटक घंटों बंद रहता है, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी होती है। उन्होंने बार-बार अंडरब्रिज बनाने की मांग उठाई है। 

**रेलवे और बालको को नुकसान**  

हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे और बालको के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मरम्मत का काम तत्काल शुरू कर दिया गया। चूंकि यह हादसा बालको की दूसरी लाइन पर हुआ, कोयले की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है। इस घटना से रेलवे और बालको को आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। 

**लोगों की शिकायत, प्रशासन मौन**  

स्थानीय निवासियों का कहना है कि शारदा विहार फाटक पर बार-बार होने वाली दिक्कतें अब रोज की समस्या बन चुकी हैं। मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही से फाटक लंबे समय तक बंद रहता है, जिससे स्कूल, अस्पताल और दफ्तर जाने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अंडरब्रिज की मांग लंबे समय से अनसुनी पड़ी है। 

**जांच में जुटी टीमें**  

रेलवे प्रबंधन ने हादसे की वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी है। क्या तकनीकी खराबी थी या कोई और कारण, इसकी तह तक जाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, मरम्मत कार्य जोरों पर है ताकि कोयला परिवहन जल्द से जल्द शुरू हो सके। यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और स्थानीय समस्याओं पर सवाल खड़े कर रही है।

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