10 हजार स्कूलों के विलय पर बवाल: शिक्षकों का आज विरोध प्रदर्शन


 

रायपुर, 28 मई 2025 — छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूलों में युक्तियुक्तकरण के फैसले ने प्रदेशभर के शिक्षकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सरकार द्वारा 10,000 से अधिक स्कूलों को मर्ज करने और शिक्षकों की तैनाती में बदलाव करने के निर्णय के खिलाफ आज बुधवार को 10 हजार से अधिक शिक्षक राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय का घेराव करने की तैयारी में हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि युक्तियुक्तकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाएगी और सरकारी स्कूलों को कमजोर करेगी। साथ ही इससे लगभग 43,849 शिक्षकीय पद समाप्त हो सकते हैं।

क्या है युक्तियुक्तकरण?

युक्तियुक्तकरण एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसमें संसाधनों और मानवबल को "बेहतर प्रबंधन" के उद्देश्य से पुनर्गठित किया जाता है। सरकार का तर्क है कि इससे दोहराव खत्म होगा, संसाधनों की बचत होगी और कामकाज में दक्षता आएगी। लेकिन शिक्षकों का मानना है कि यह सिर्फ वर्कलोड बढ़ाने और नौकरियां घटाने का तरीका है।

शिक्षकों का पक्ष

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के कारण प्रदेश के हजारों शिक्षकों को सरप्लस (अधिशेष) घोषित कर दिया गया है, जबकि यह स्थिति विभागीय लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 के सेटअप के अनुसार प्रत्येक प्राइमरी स्कूल में कम से कम तीन शिक्षक (1 प्रधान + 2 शिक्षक) और पूर्व माध्यमिक में पांच शिक्षक (1 प्रधान + 4 शिक्षक) का प्रावधान है। लेकिन वर्तमान योजना में यह घटाकर क्रमशः 1+1 और 1+3 कर दिया गया है।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

शिक्षकों का कहना है कि एक स्कूल में दो शिक्षक 1 से 5वीं तक की सभी कक्षाओं के 18 पीरियड नहीं संभाल सकते। इससे न केवल शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

वहीं राज्य के कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 6,872 प्राइमरी स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक है और 212 स्कूलों में कोई भी शिक्षक नहीं है। इसी तरह 255 प्री मिडिल स्कूलों में एकमात्र शिक्षक हैं और 48 में एक भी नहीं।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के अनुरूप उठाया गया है, जिसमें एक शिक्षक पर 30 छात्रों की सीमा तय की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के प्राइमरी स्कूलों में औसतन 22 छात्रों पर एक शिक्षक और प्री मिडिल में 26 छात्रों पर एक शिक्षक हैं।

सरकार का तर्क है कि शिक्षक पर्याप्त हैं लेकिन उनका वितरण असमान है। इसलिए युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षकों को जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाएगा, जिससे नई भर्ती की आवश्यकता भी कम हो जाएगी।

स्कूल मर्ज करने के दो फॉर्मूले

  1. तीन स्तरों को एकीकृत करना – प्राइमरी से हायर सेकेंडरी स्कूलों को एक ही परिसर और एक ही प्राचार्य के अंतर्गत लाने की योजना।

  2. छात्र संख्या आधारित समायोजन – 10 से कम छात्र वाले ग्रामीण स्कूलों को पास के स्कूलों में और 30 से कम छात्र वाले शहरी स्कूलों को 500 मीटर के दायरे में मर्ज किया जाएगा।

आंदोलन की चेतावनी

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 2008 के सेटअप के अनुसार युक्तियुक्तकरण नहीं किया और पद समाप्त किए तो आंदोलन तेज किया जाएगा। टीचर्स एसोसिएशन ने कहा कि शिक्षक वर्ग केवल अपनी नौकरियों की नहीं, बल्कि प्रदेश के बच्चों के भविष्य की लड़ाई लड़ रहा है।

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