**खबर का असर: गंदगी से भरे शवगृह में अब चमक, BMO ने संभाली जिम्मेदारी, सुधरी व्यवस्था**

 **खबर का असर: गंदगी से भरे शवगृह में अब चमक, BMO ने संभाली जिम्मेदारी, सुधरी व्यवस्था**

**आरंग।** लल्लूराम डॉट कॉम की खबर ने एक बार फिर कमाल दिखाया है। आरंग के वार्ड नं. 6 में निर्माणाधीन मुक्तिधाम के शवगृह में फैली गंदगी और बदबू की समस्या को लेकर हमारी खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। BMO डॉ. विजयलक्ष्मी अनंत ने तुरंत जिम्मेदारी संभाली और शवगृह में साफ-सफाई करवाकर व्यवस्था को दुरुस्त किया।

**गंदगी और बदबू में हो रहा था पोस्टमॉर्टम**  

बीते शुक्रवार को एक शव के पोस्टमॉर्टम के लिए शवगृह खोला गया तो वहां असहनीय बदबू और गंदगी का आलम था। चैंबर में खून के धब्बे, गंदे स्ट्रेचर और दीवारों पर जमी गंदगी ने साफ कर दिया था कि लंबे समय से सफाई नहीं हुई। इस अव्यवस्था को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद तत्काल साफ-सफाई कराई गई। हालांकि, स्थानीय लोग चिंतित हैं कि क्या यह सफाई नियमित रूप से जारी रहेगी?

**नगर पालिका का काम अब भी अधूरा**  

शवगृह का निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है। नगर पालिका के तहत सृजन बिल्डकॉन रायपुर द्वारा किया जा रहा यह कार्य 3 साल बाद भी लटका हुआ है। सरकार ने जन सुविधा के लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन बिजली और पानी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी। बिजली होने पर फ्रीजर और रात में पोस्टमॉर्टम के लिए रोशनी की सुविधा मिल सकती है। इंजीनियर ने एक हफ्ते में काम पूरा करने का दावा किया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी शीतल चंद्रवंशी ने भी जल्द निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया है।

**पोस्टमॉर्टम के नाम पर वसूली की शिकायत**  

कुछ परिजनों ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान स्वास्थ्य कर्मचारी पैसे की मांग करते हैं। पैसे न देने पर काम में लापरवाही बरती जाती है। इस पर BMO डॉ. विजयलक्ष्मी अनंत ने कहा कि ऐसी कोई शिकायत उनके पास नहीं आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम निःशुल्क होता है और अगर कर्मचारी पैसे मांग रहे हैं, तो परिजन उनसे शिकायत कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

**नागरिकों की उम्मीदें**  

शवगृह में साफ-सफाई और व्यवस्था में सुधार से स्थानीय लोगों को राहत मिली है, लेकिन नियमित रखरखाव और निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद अब भी बाकी है। लल्लूराम डॉट कॉम की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि सही मुद्दे उठाने से बदलाव संभव है।

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