छत्तीसगढ़ में दर्दनाक सड़क हादसे: एक दिन में दो दुर्घटनाएं, चार लोगों की मौत, कई घायल


 

छत्तीसगढ़ राज्य में सड़क हादसों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। बीते रविवार की रात राज्य के दो अलग-अलग जिलों में हुए दो भीषण हादसों ने चार परिवारों की खुशियाँ छीन लीं। एक ओर महासमुंद जिले में ट्रैक्टर और बाइक की आमने-सामने की टक्कर में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर-रायपुर रोड पर इनोवा कार के अनियंत्रित होकर पलटने से एक युवक की जान चली गई और दो अन्य घायल हो गए। ये हादसे न सिर्फ सिस्टम की लापरवाही, बल्कि तेज रफ्तार और असावधानी का भी परिणाम हैं।


पहला हादसा: बिलासपुर-रायपुर रोड पर रफ्तार बनी काल, इनोवा पलटी, युवक की मौत

बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र में रविवार रात एक इनोवा कार के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा रात करीब 2:30 बजे हुआ जब तीन युवक—पंकज छाबड़ा, जैकी गेही और आकाश चांदनी—बिलासपुर से पार्टी कर लौट रहे थे।

संडे एंजॉय बना काल का बुलावा

तीनों युवक रविवार को संडे एंजॉय करने के लिए बिलासपुर आए थे और देर रात पार्टी करने के बाद अपनी इनोवा कार (CG 10 BK 2221) से चकरभाठा लौट रहे थे। घटना गुरु नानक ढाबा के पास की है, जहां उनकी तेज रफ्तार इनोवा कार अचानक अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से टकराकर हवा में उछल गई।

कार से बाहर फेंके गए युवक

तेज टक्कर के कारण इनोवा के दरवाजे खुल गए और तीनों युवक कार से बाहर फेंक दिए गए। इस दौरान जैकी गेही सीधे डिवाइडर के पास लगे लोहे के एंगल से टकरा गया। सिर, कंधे और सीने पर गहरी चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं आकाश और पंकज भी दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

कार की रफ्तार नहीं थमी, दूसरी गाड़ियों से टकराई

हैरत की बात यह रही कि तीनों युवकों के बाहर गिरने के बाद भी इनोवा की रफ्तार नहीं थमी। गाड़ी आगे जाकर एक "छोटा हाथी" वाहन से टकराई और फिर करीब 4-5 बार पलटती हुई एक ढाबे के बाहर खड़ी अर्टिगा कार से जा टकराई। इस टक्कर में अर्टिगा में बैठे चालक को भी चोटें आईं।

CCTV में कैद हुई पूरी घटना

यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह तेज रफ्तार इनोवा उछलती हुई डिवाइडर से टकराई और फिर पलटती चली गई। कैमरे में एक युवक सड़क पर घसीटता हुआ भी दिख रहा है, जिससे इस हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता

हादसे के बाद मौके पर आसपास के लोग दौड़ते हुए पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जैकी गेही को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य दो का इलाज जारी है।


दूसरा हादसा: महासमुंद जिले में बाइक-ट्रैक्टर टक्कर, तीन युवकों की मौत

रविवार रात महासमुंद जिले के ग्राम शेर में एक और दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। बाइक और ट्रैक्टर की आमने-सामने की टक्कर में दो सगे भाइयों समेत तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना का विवरण

वरुण नायक (22), केवल नायक (19) और उनके मित्र तीरथ दीवान (19) बाइक से महासमुंद से वापस अपने गांव शेर लौट रहे थे। रात करीब 9:30 बजे, जब वे महासमुंद-राजिम रोड पर पहुंचे, उनकी बाइक एक ट्रैक्टर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों युवक दूर जा गिरे और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं।

स्थानीय लोगों ने दी सूचना, पर बचाया न जा सका

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस और एम्बुलेंस को बुलाया। तीनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।

ट्रैक्टर चालक फरार, पुलिस तलाश में जुटी

हादसे के बाद से ट्रैक्टर चालक मौके से फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। वहीं मृतकों के गांव में मातम पसरा हुआ है। दो सगे भाइयों को एक साथ खोने का ग़म उनके माता-पिता और पूरे परिवार के लिए असहनीय है।


पिछले 9 दिनों में महासमुंद में 13 मौतें

महासमुंद जिला पिछले कुछ समय से सड़क हादसों का गढ़ बनता जा रहा है। पिछले 9 दिनों में जिले में हुई विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता पर भी सवाल खड़े करता है।


क्या कहता है प्रशासन?

महासमुंद के सिटी कोतवाली प्रभारी शरद दुबे ने बताया कि “हम जल्द ही ट्रैक्टर चालक को पकड़ लेंगे। मृतकों के परिजनों को प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता दी जाएगी।” वहीं, बिलासपुर हादसे की जांच भी शुरू कर दी गई है और दुर्घटना की परिस्थितियों को लेकर फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


समाज में बढ़ती लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?

इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सड़क सुरक्षा के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ट्रैफिक नियंत्रण, हेलमेट और सीट बेल्ट के पालन की अनदेखी और ओवरस्पीड जैसे कारण जानलेवा बनते जा रहे हैं। न तो सड़कें सुरक्षित हैं और न ही वाहन चालक सतर्क।

विशेषज्ञों की राय

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सड़क सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता की बेहद कमी है। न तो युवाओं को यातायात नियमों की जानकारी है और न ही ड्राइवरों में अनुशासन की भावना। ट्रैक्टर जैसे भारी वाहन भी रात में बिना लाइट या रिफ्लेक्टर के चलते हैं, जिससे टकराव की संभावना बढ़ जाती है।


क्या किया जाना चाहिए?

  1. रात्रिकालीन चेकिंग: तेज रफ्तार और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ रात में विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।

  2. हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्यता: सख्त नियम बनाकर इनकी जांच की जानी चाहिए।

  3. ग्रामीण मार्गों पर रिफ्लेक्टर और लाइटिंग की व्यवस्था: ताकि रात में वाहन स्पष्ट दिखाई दें।

  4. सीसीटीवी कवरेज बढ़ाना: हादसों के बाद सच्चाई जानने में मदद मिलती है।

  5. जनजागरूकता अभियान: खासकर युवाओं के बीच।


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