धमतरी में स्कूल युक्तियुक्तकरण के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, बीईओ कार्यालय का घेराव


 

धमतरी, छत्तीसगढ़ – राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही स्कूल युक्तियुक्तकरण योजना के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को धमतरी में जोरदार प्रदर्शन किया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शहर और ग्रामीण के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर रैली निकाली और बीईओ कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़ते हुए कार्यालय परिसर में प्रवेश कर विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विधायक ओंकार साहू ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा 10,463 स्कूलों को समाहित करने की योजना से न केवल 45 हजार शिक्षकों की नौकरियां खतरे में हैं, बल्कि इससे आदिवासी और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या घटाकर 1+2 से 1+1 कर रही है, जिससे एक शिक्षक पर पूरी शाला संचालन की जिम्मेदारी आ जाएगी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक है। “एक प्रधान पाठक पहले से ही बैठकों और शासकीय कार्यों में व्यस्त रहता है, ऐसे में एकमात्र शिक्षक की छुट्टी होने पर बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी,” उन्होंने चेताया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी की सरकार थी, तब बंद स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया था और आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल जैसी योजनाएं लागू की गई थीं। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर रही है और साथ ही 67 नई शराब दुकानें खोलकर सामाजिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा रही है।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। नेताओं ने कहा कि यह नीति न केवल शिक्षकों के रोजगार पर खतरा है, बल्कि स्कूली स्टाफ जैसे प्यून, रसोइया, मध्यान्ह भोजन बनाने वाली महिलाएं और स्व-सहायता समूह की सदस्याओं के जीवनयापन पर भी संकट खड़ा करेगी।

बीईओ का बयान: प्रदर्शन के बाद बीईओ ने कहा कि कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर सभी बिंदुओं पर विचार किया जाएगा।

कांग्रेस के इस आंदोलन ने युक्तियुक्तकरण नीति के सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गरमाने की संभावना है।

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