छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मोहड़ गांव में रेत माफिया की गुंडागर्दी सामने आई है। अवैध रेत खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर माफिया के गुर्गों ने कट्टे से छह राउंड फायरिंग की और जमकर मारपीट की। इस हमले में तीन युवक घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घायल युवक रोशन मंडावी के सिर को छूकर गोली निकल गई, जिसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। वहीं, जितेंद्र साहू और रोशन ठाकुर को भी मारपीट में चोटें आई हैं, फिलहाल तीनों की हालत स्थिर है।
चार दिन से चल रहा था अवैध खनन, विरोध में पहुंचे थे ग्रामीण
मोहड़ गांव में बीते चार दिनों से अवैध रेत खनन लगातार चल रहा था, जिससे नाराज होकर बुधवार देर रात ग्रामीणों ने खुद रेत चोरों को पकड़ने की ठानी। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, माफिया के साथ बहस के बाद हालात बिगड़ गए। माफिया के गुर्गों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
पुलिस पर संरक्षण का आरोप, ग्रामीणों ने गाड़ी रोकी
वारदात की सूचना मिलते ही बसंतपुर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी को गांव में घुसने नहीं दिया। महिलाओं ने रास्ता रोककर विरोध जताया। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया को स्थानीय पार्षद, खनिज विभाग और पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिससे उनकी गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही।
मौके पर पुलिस बल तैनात, दो संदिग्ध हिरासत में
मौके पर पहुंचे एडिशनल एसपी राहुल देव शर्मा ने बताया कि घायल युवकों का इलाज जारी है और मामले की जांच की जा रही है। गांव में स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। फिलहाल दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
खनिज विभाग और प्रशासन पर सवाल, कोई ठोस कार्रवाई नहीं
इस हमले के बाद भी खनिज विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाइश देकर माहौल शांत किया है, लेकिन लोगों में अब भी नाराजगी है।
गरियाबंद में भी माफिया का कहर, पत्रकारों पर हमला
गौरतलब है कि तीन दिन पहले गरियाबंद जिले में भी रेत माफिया ने खबर कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हमला किया था। राजिम थाना क्षेत्र के पितईबंद घाट में माफियाओं ने पत्रकारों से मारपीट कर कैमरा और पहचान पत्र छीन लिए थे। इस दौरान भी हवाई फायरिंग की गई थी।
इन घटनाओं से साफ है कि प्रदेश में अवैध रेत खनन से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं। ग्रामीणों और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
