17 गायों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त: अफसरों की जिम्मेदारी तय कर सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश, राज्य सरकार से शपथ-पत्र तलब जनहित याचिका पर अब तक 33 बार हो चुकी सुनवाई, फिर भी हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे


 

बिलासपुर, 17 जुलाई 2025
रतनपुर-केंदा मार्ग पर तेज रफ्तार हाइवा से कुचलकर 17 गायों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की विशेष खंडपीठ ने दोपहर 2:15 बजे सुनवाई की और स्पष्ट निर्देश दिए कि अब केवल कागजी जवाबदेही नहीं, बल्कि सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, "हम इस मामले की मॉनिटरिंग लगातार कर रहे हैं। इसके बावजूद घटनाएं लगातार हो रही हैं, जो बेहद दुखद है। संबंधित अफसरों और निकायों की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब समय आ गया है कि जिनकी लापरवाही से यह हादसे हो रहे हैं, उनके सर्विस रिकॉर्ड में इसे दर्ज किया जाए।"

मुख्य सचिव और एनएचएआई अफसरों से शपथ-पत्र की मांग

कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर से इस पूरे घटनाक्रम पर हलफनामा (शपथ पत्र) प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि मवेशियों को सड़कों से हटाने और यातायात सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई एसओपी को सिर्फ कागजों में सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाए।

एसओपी की हकीकत पर सवाल

28 अप्रैल 2025 को इसी विषय पर हुई पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि सड़कों पर मवेशियों की मौत को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी गई है। कोर्ट ने तब भी चेताया था कि एसओपी को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, क्योंकि यह केवल ग्रामीणों की नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की भी जिम्मेदारी है।

हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी – “गाड़ियों में पकड़ सकते हो तो सड़कों से क्यों नहीं?”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "जब मवेशियों को गाड़ियों में भरकर पकड़ सकते हैं, तो उन्हें सड़कों से हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?” यह सवाल राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब पर कोर्ट की नाराजगी को स्पष्ट करता है।

जनहित याचिकाओं पर 33 बार सुनवाई, फिर भी नतीजा शून्य

बता दें कि वर्ष 2019 में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें सड़कों की जर्जर हालत, मवेशियों के कारण होने वाले सड़क हादसों और पशुओं की मौत जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया था। अब तक इस पर 33 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन हालात में कोई ठोस बदलाव नहीं आया।

पुलिस ने ड्राइवर और मवेशी मालिकों पर FIR की

इधर, रतनपुर थाना पुलिस ने हादसे के संबंध में तेज रफ्तार हाइवा चालक के साथ-साथ मवेशी मालिकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 291 के तहत कार्रवाई की गई है, जो सार्वजनिक स्थानों पर जानवर छोड़ने और लापरवाही से मवेशियों की मौत के लिए उत्तरदायी ठहराता है।

घटना का विवरण

सोमवार देर रात एनएच-45 पर ग्राम बारीडीह के पास पेट्रोल पंप के नजदीक तेज गति से आ रहे हाइवा ने सड़क पर बैठी गायों को कुचल दिया। हादसे में 17 गायों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 5 गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश है और लोग प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं।

अगली सुनवाई 31 जुलाई को

इस मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 31 जुलाई 2025 तय की है। तब तक राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को जवाब तैयार कर कोर्ट में पेश करना होगा।

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