सीहोर में सहारा इंडिया से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। दो साल पहले दर्ज हुई एफआईआर के बाद आखिरकार सहारा इंडिया के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय प्रबंधक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र से सोमवार, 25 अगस्त को की गई। आरोपी का नाम शिवाजी सिंह है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निवासी हैं और वर्तमान में भोपाल की अवधपुरी कॉलोनी में रहते थे।
मामला कैसे शुरू हुआ
जनवरी 2023 में सीहोर जिले के निवासी राजाराम राठौर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सहारा इंडिया में उनकी जमा राशि कंपनी के अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी से हड़प ली गई। शिकायत में उन्होंने क्षेत्रीय प्रबंधक शिवाजी सिंह, सीहोर शाखा प्रबंधक एसके मगरदे, कैशियर योगेंद्र चौधरी और एक अन्य कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराया था। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और मध्यप्रदेश जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीहोर पुलिस अधीक्षक दीपक शुक्ला ने नगर पुलिस अधीक्षक अभिनंदन शर्मा और कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक रवींद्र यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। लगातार निगरानी और खोजबीन के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि क्षेत्रीय प्रबंधक भोपाल के एमपी नगर इलाके में मौजूद है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में पेशी और रिमांड
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया, ताकि आगे की जांच पूरी की जा सके। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमा राशि के साथ धोखाधड़ी में और कौन-कौन से लोग शामिल थे और कितने हितग्राही प्रभावित हुए हैं।
सहारा इंडिया के खिलाफ लगातार विवाद
सहारा इंडिया से जुड़े मामलों की शिकायतें देशभर के कई हिस्सों में सामने आती रही हैं। कई वर्षों से निवेशकों ने अपनी जमा राशि वापस न मिलने को लेकर आवाज उठाई है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में लोग कंपनी के एजेंटों और अधिकारियों के जरिए निवेश कर चुके हैं। इस घटना ने एक बार फिर उन हितग्राहियों की चिंता बढ़ा दी है, जिनकी मेहनत की कमाई कंपनी में फंसी हुई है।
आगे की जांच
सीहोर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कंपनी के अन्य अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में कितनी गहराई तक शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों की कुल कितनी राशि हड़पी गई और क्या इसे वापस दिलाने की कोई संभावना बन सकती है।
इस गिरफ्तारी से निवेशकों में थोड़ी उम्मीद जगी है कि शायद लंबे समय से अटके हुए मामलों में अब कुछ प्रगति हो सकेगी। हालांकि, यह मामला कितना बड़ा रूप लेगा और कितने और नाम इसमें उजागर होंगे, यह आगे की जांच से ही स्पष्ट होगा।