भिलाई स्टील प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस हादसा: आग पर काबू, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


 

भिलाई। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार की देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस-8 में अचानक डस्ट क्रिएटर फटने से भीषण आग लग गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के क्षेत्रों तक सुनाई दी। देखते ही देखते लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगीं। संयंत्र परिसर के स्टोर और नजदीकी हिस्से भी आग की चपेट में आ गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

घटना के बाद प्लांट प्रबंधन ने तुरंत अग्निशमन दल को मौके पर तैनात किया। चार से पांच फायर ब्रिगेड की टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकलकर्मियों ने लगातार पानी की बौछार और केमिकल फोम का इस्तेमाल कर आग को फैलने से रोका। रातभर की कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका।

तकनीकी जांच शुरू, नुकसान का आकलन

प्लांट प्रबंधन ने पुष्टि की है कि घटना में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल मशीनों और प्रभावित हिस्सों का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर यह कहा जा रहा है कि डस्ट क्रिएटर में अचानक प्रेशर बढ़ने के कारण यह हादसा हुआ। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम घटना के कारणों की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक वजह स्पष्ट होगी।

पूर्व में भी हो चुके हैं हादसे

भिलाई स्टील प्लांट में हादसों का यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2014 और 2018 में भी बड़े हादसे हो चुके हैं। 2014 में गैस पाइपलाइन लीक होने से कई मजदूरों की मौत हुई थी, जबकि 2018 में हुए ब्लास्ट में दर्जनों कर्मचारी घायल हुए थे। इन घटनाओं के बाद से लगातार यह सवाल उठते रहे हैं कि प्रबंधन सुरक्षा उपकरणों और तकनीकी निगरानी को लेकर पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठा रहा।

कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में रोष

घटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ब्लास्ट फर्नेस जैसे संवेदनशील हिस्सों में हर समय उच्च स्तरीय सुरक्षा उपकरण सक्रिय रहना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि बार-बार चेतावनी देने और सुझाव देने के बावजूद प्रबंधन इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता।

कर्मचारी संगठनों ने यह भी कहा कि नियमित जांच और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट के आसपास रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा भी खतरे में रहती है, इसलिए प्रबंधन को गंभीरता दिखानी चाहिए।

प्रबंधन ने दी सफाई

इस घटना पर भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई है और सभी सुरक्षित हैं। प्रबंधन का दावा है कि कर्मचारियों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल

औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा इंतजाम किए जाने जरूरी हैं। यदि मशीनों की समय-समय पर सर्विसिंग, निरीक्षण और मॉनिटरिंग नहीं की जाती तो इस प्रकार के हादसे बार-बार सामने आते रहेंगे। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा उपायों को लेकर ढिलाई बरती गई तो भविष्य में इससे भी बड़े नुकसान की आशंका बनी रहेगी।

जनहानि न होने से राहत

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस भीषण आग के बावजूद किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। दमकल विभाग और कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि आग बुझाने में लंबा समय लगा और इस दौरान उत्पादन पूरी तरह ठप रहा।

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