**बिलासपुर में रेत माफिया का खेल: हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर, अवैध खनन और डंपिंग जोरों पर**
बिलासपुर में रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। हाईकोर्ट की सख्त हिदायतों के बावजूद रेत का अवैध खनन और परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा। मानसून में अभी ढाई महीने का वक्त बाकी है, लेकिन माफिया ने अभी से रेत खोदकर डंप करने की रफ्तार तेज कर दी है। खनिज विभाग भले ही कार्रवाई के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। शुक्रवार को राजस्व विभाग ने मस्तूरी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार हाईवा और एक ट्रैक्टर को पकड़ा।
**मस्तूरी में रेत माफिया का गढ़**
अरपा और शिवनाथ नदी के किनारे मस्तूरी क्षेत्र में रेत का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। जोंधरा, गोपालपुर, परसोढी, भिलौनी, हरदी गोबरी जैसे इलाकों में करीब 10 जगहों पर माफिया सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गोरखधंधे में बड़े और रसूखदार लोग शामिल हैं। मस्तूरी एसडीएम को मिली शिकायत के बाद नायब तहसीलदार अप्रतिम पांडेय की टीम ने जोंधरा से शिवनाथ नदी की ओर जाने वाले रास्ते पर छापा मारा। मौके पर चार हाईवा और एक ट्रैक्टर रेत ले जाते पकड़े गए।
**माफिया की चालाकी, लेकिन प्रशासन सतर्क**
छापेमारी के दौरान दो वाहन चालक मौके से फरार हो गए। उनके वाहनों को कोटवार की निगरानी में रखा गया है, जबकि बाकी तीन वाहनों को पचपेड़ी थाने के हवाले कर दिया गया। प्रशासन ने नदी तक जाने वाले रास्तों को बंद कर तस्करी पर लगाम लगाने की कोशिश की है।
**तखतपुर में भी माफिया पर शिकंजा**
तखतपुर तहसील के पकरिया गांव में तहसीलदार पंकज सिंह की अगुवाई में राजस्व विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। यहां अवैध रूप से बनाई गईं 30 हजार ईंटें जब्त की गईं। इन्हें सरपंच और कोटवार की जिम्मेदारी में सौंपकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई से माफिया में खलबली मच गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी।
**हाईकोर्ट की फटकार, फिर भी ढीला रवैया**
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खनिज विभाग को अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद जिले में रेत का अवैध कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खनिज विभाग की शह पर ही यह खेल फल-फूल रहा है। कार्रवाइयां सिर्फ खानापूरी तक सीमित हैं।
**क्या रुकेगा रेत का काला कारोबार?**
बिलासपुर में रेत माफिया के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाइयां कितनी असरदार होंगी, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन स्थानीय लोग अब सख्त और पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोका जा सके।
