बालोद: नगाड़ा बजा, मंजीरा गूंजा... सरकार को जगाने अनोखे अंदाज़ में उतरे पंचायत सचिव!

बालोद: नगाड़ा बजा, मंजीरा गूंजा... सरकार को जगाने अनोखे अंदाज़ में उतरे पंचायत सचिव शासकीयकरण की मांग को लेकर सचिवों का प्रदर्शन जारी, बोले - अब जंतर-मंतर तक की तैयारी

बालोद जिले के पंचायत सचिव इन दिनों अपने अधिकारों की लड़ाई को लेकर सड़कों पर हैं। शासकीयकरण की मांग को लेकर बीते 17 मार्च से हड़ताल पर बैठे सचिवों ने सोमवार को सरकार को जगाने के लिए अनोखा रास्ता चुना। धरना स्थल पर नगाड़ा और मंजीरा बजाकर उन्होंने प्रदर्शन किया और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।



सचिवों ने कहा कि "मोदी की गारंटी" के तहत उन्हें शासकीयकरण का वादा किया गया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सचिवों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन जंतर-मंतर तक पहुंचेगा।

“गारंटी दी थी, अब निभाइए!”

पंचायत सचिव संघ के सदस्य सचिन मुकेश्वरी साहू ने कहा,

"सरकार कहती है मोदी की गारंटी मतलब पक्की गारंटी, तो फिर हमारे शासकीयकरण की गारंटी क्यों अधूरी है? अब हालात ये हैं कि सरकार के नुमाइंदे बात तक नहीं कर रहे।"

उन्होंने बताया कि आज नगाड़ा बजाकर प्रदर्शन किया गया, तो कल रामायण पाठ और फिर अन्य चरणबद्ध आंदोलन होंगे।

"जीवनयापन संकट में, सेवा के बाद भी भविष्य अधर में"

सचिव पन्नालाल सिन्हा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे 1995-96 से सेवा दे रहे हैं, पर आज भी अल्प वेतन में गुज़ारा करना पड़ रहा है। कुछ सचिव रिटायर हो चुके हैं, कुछ जल्द होने वाले हैं—बिना पेंशन, बिना किसी सहारे।

हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार हमें न्याय दे और हमारा भविष्य सुरक्षित करे।”

सरपंच बोले – सचिवों के बिना रुका गांव का विकास

सचिवों की हड़ताल का असर पंचायतों में भी साफ दिख रहा है। नव निर्वाचित सरपंच राजेंद्र कुमार साहू ने बताया कि सचिवों के अभाव में कई विकास कार्य ठप हैं।

नियम-कानून की जानकारी न होने के कारण हम सरपंच भी कई जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे।”

क्या सरकार अब भी सोई रहेगी? या सचिवों के नगाड़े की गूंज सत्ता के गलियारों 



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