भिलाई, 25 मई 2025
छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में गुरुवार रात जयंती नगर क्षेत्र से पुलिस ने दो बांग्लादेशी युवतियों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि ये महिलाएं फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के सहारे स्थानीय नागरिक बनकर रह रही थीं और इनमें से एक महिला के देह व्यापार से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जयंती नगर क्षेत्र में एक किराए के मकान में दो संदिग्ध महिलाएं रह रही हैं, जो खुद को भारतीय बता रही हैं। दबिश के दौरान इन महिलाओं की पहचान सपना मंडल उर्फ सपना नूर और खुशबू उर्फ रानी पासवान के रूप में हुई। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि दोनों महिलाएं बांग्लादेश की मूल निवासी हैं और अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कर चुकी हैं।
सपना की पहचान और गतिविधियाँ
सपना मंडल, जिसे सपना नूर या सनाया नूर के नाम से भी जाना जा रहा है, ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह मूल रूप से जोबरहाट जिला, दिनाजपुर, बांग्लादेश की निवासी है। वह करीब 15 वर्ष पहले भारत में अवैध रूप से घुसी थी और पहले सिलीगुड़ी में रही, फिर बाघा जोतीन जाधवपुर, पश्चिम बंगाल में बस गई।
वर्षों तक अलग-अलग जगहों पर पहचान बदलकर रहने के बाद उसने अभय शर्मा, निवासी पदुमनगर भिलाई, से संबंध बनाकर स्वयं को उनकी पत्नी बताया और सभी भारतीय दस्तावेज — आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, और बैंक खाता — तैयार कर लिए। पुलिस को सपना के मोबाइल फोन से 15 बांग्लादेशी मोबाइल नंबर मिले हैं, जिससे यह पुष्टि होती है कि वह बांग्लादेशी नागरिकों से संपर्क में थी।
खुशबू की फर्जी पहचान
वहीं दूसरी युवती खुशबू उर्फ रानी पासवान ने भी फर्जीवाड़े की पूरी पटकथा रच रखी थी। वह भी दिनाजपुर के भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से घुसपैठ कर भारत में प्रवेश कर गई थी। सबसे पहले उसने 5 साल दिनाजपुर में रहकर अपनी नई पहचान 'खुशबू' के रूप में बनाई। फिर आसनसोल पहुंची और वहां राजन निवासी लच्छीपुर, कुल्टी, पश्चिम बंगाल को पति बताकर आधार कार्ड बनवाया।
पुलिस की पूछताछ से पहले ही उसने अपने मोबाइल फोन का सारा डेटा डिलीट कर दिया था, जिससे शक होता है कि वह गिरफ्तारी से पहले सबूत मिटाने की कोशिश कर रही थी।
गंभीर सुरक्षा मामला बन सकता है
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन महिलाओं के पास से जो दस्तावेज मिले हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं। उन्होंने बैंक खाते तक खुलवा लिए थे और स्थानीय स्तर पर रहन-सहन पूरी तरह भारतीयों जैसा बना रखा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने फर्जी शादी करके सामाजिक रूप से भारतीय नागरिक बनने का प्रयास किया था।
बांग्लादेशी नेटवर्क से जुड़ाव
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि दोनों महिलाएं ईमो एप और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से बांग्लादेश के नागरिकों से लगातार संपर्क में थीं। इससे यह आशंका और भी गहरा गई है कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि किसी बड़े घुसपैठ नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है।
अब तक पांच बांग्लादेशी पकड़े गए
इस मामले को मिलाकर दुर्ग जिले में अब तक पांच बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारतीय पहचान बनाई है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों महिलाओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उनके पास मिले मोबाइल फोन, दस्तावेज और बैंक खाता विवरणों की विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही, उनके भारतीय पतियों की भूमिका और दस्तावेज बनाने में सहयोग देने वालों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह मामला केवल अवैध घुसपैठ का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई न की गई, तो यह भविष्य में गंभीर खतरा बन सकता है।
