सिक्कों की किल्लत से जूझ रही न्यायधानी, छोटे व्यापारियों को भारी परेशानी


 

बाजारों में 5, 10 और 20 रुपये के सिक्के हुए दुर्लभ, जमाखोरी की आशंका गहराई

रायपुर, छत्तीसगढ़ – राज्य की न्यायधानी रायपुर इन दिनों गंभीर नकदी संकट से गुजर रही है। खासतौर पर छोटे मूल्यवर्ग के सिक्कों – 5, 10 और 20 रुपये – की कमी से बाजारों में लेन-देन बाधित हो गया है। दिवाली तक जो सिक्के आसानी से उपलब्ध थे, वे अब दुकानों और बैंकों से लगभग नदारद हो गए हैं।

गोलबाजार, बृहस्पति बाजार, बुधवारी, तेलीपारा और पुराना बस स्टैंड जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में चाय ठेले, सब्जी विक्रेता, फुटकर दुकानदार और ऑटो चालकों को खुले पैसों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लेन-देन की प्रक्रिया धीमी हो रही है, जिससे व्यापारियों की बिक्री भी प्रभावित हो रही है।

आरबीआई ने भेजे सिक्के, पर नहीं पहुंचे बाजार तक

सूत्रों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने हाल ही में करेंसी चेस्ट के माध्यम से बैंकों को सिक्कों की आपूर्ति की थी, लेकिन वह सिक्के आम जनता और बाजार तक नहीं पहुंच पाए। बैंक सूत्रों का दावा है कि कुछ संगठनों और व्यक्तियों द्वारा जानबूझकर बड़ी मात्रा में सिक्कों की जमाखोरी की जा रही है। इसके कारण नकदी का कृत्रिम संकट उत्पन्न हो रहा है।

जांच और निगरानी की मांग

स्थानीय व्यापार संघों और उपभोक्ताओं ने इस गंभीर समस्या को लेकर चिंता जाहिर की है और प्रशासन से मामले की जांच करवाने तथा जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली, तो बाजारों में उपभोक्ता और व्यापारी दोनों का विश्वास कमजोर होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां और अधिक सुस्त पड़ सकती हैं।

बैंकों में भी खुल्ले की मारामारी

बैंकों में भी ग्राहक सिक्कों के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। कई बैंक कर्मचारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि ग्राहकों की मांग के अनुरूप सिक्के उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह है कि बैंक कैश काउंटरों पर सिक्कों की खपत तो हो रही है, लेकिन स्टॉक की भरपाई नहीं हो रही।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

यह सवाल अब प्रमुखता से उठ रहा है कि करेंसी चेस्ट से निकलने के बावजूद सिक्के बाजार तक क्यों नहीं पहुंच रहे? यदि जमाखोरी हो रही है, तो संबंधित विभागों द्वारा कोई निगरानी या कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

फिलहाल, जनता और व्यापारी वर्ग को इस संकट से जल्द राहत की उम्मीद है। आवश्यक है कि आरबीआई और प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से ध्यान दे और सुनिश्चित करे कि सिक्कों की निर्बाध आपूर्ति बाजार तक पहुंचे, ताकि छोटे लेन-देन सुचारु रूप से चलते रहें।

Post a Comment

Previous Post Next Post