छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट ले चुका है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और तूफानी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। खासतौर पर 6 मई तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रह सकता है।
मौसम ने ली उग्र रूप
राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग, महासमुंद, रायगढ़, अंबिकापुर, बस्तर और कोरबा जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई है। कुछ जगहों पर ओले भी गिरे हैं। हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है, जिससे पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
अलर्ट पर प्रशासन
मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जिला प्रशासन ने भी आपदा प्रबंधन दलों को अलर्ट पर रखा है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे खराब मौसम के दौरान घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया, “हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। तेज हवा और बारिश के कारण कुछ जगहों पर पेड़ गिरने और बिजली के तार टूटने की शिकायतें मिली हैं। राहत व बचाव कार्य के लिए टीमें तैनात हैं।”
किसानों की चिंता बढ़ी
राज्य के कई हिस्सों में खेतों में फसलें अभी भी खड़ी हैं। इस बेमौसम बारिश और तूफान से किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। विशेष रूप से सब्जियों और दलहनों की फसल प्रभावित हो रही है। किसान संघों ने सरकार से आग्रह किया है कि नुकसान का आकलन कर शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए।
क्या कहता है मौसम विभाग?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रायपुर केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण के चलते यह परिवर्तन हुआ है। इस प्रणाली का असर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा। तापमान में गिरावट आई है, लेकिन उमस और आंधी के कारण लोग परेशान हैं।
एक मौसम वैज्ञानिक ने बताया, “छत्तीसगढ़ में 3 से 6 मई तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवा चलने की संभावना है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे खुले में पेड़ के नीचे न खड़े हों और वाहन सावधानी से चलाएं।”
जनजीवन पर असर
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का असर लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ा है। स्कूलों में उपस्थिति कम हुई है और ट्रैफिक पर भी असर देखा जा रहा है। कई जगहों पर बिजली गुल होने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाजारों में भी लोगों की आवाजाही कम हो गई है।
सावधानी और सुरक्षा के उपाय
प्रशासन और विशेषज्ञों ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। घरों में आपातकालीन लाइट, पीने का पानी और मोबाइल चार्ज रखने की सलाह दी गई है। किसानों को फसलों को बचाने के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की चेतावनी दी गई है।
छत्तीसगढ़ में मौसम का यह मिजाज फिलहाल लोगों को राहत नहीं दे रहा है, लेकिन अगर लोग सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, तो किसी बड़ी आपदा से बचा जा सकता है।
