स्वामी आत्मानंद स्कूल मोवा में जलभराव को लेकर NSUI का हंगामा, जिम्मेदारों पर उठाए सवाल


 

रायपुर, 27 जुलाई 2025: राजधानी रायपुर के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, मोवा में भारी जलभराव और अव्यवस्थाओं के खिलाफ रविवार को NSUI ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्कूल की खस्ताहाल स्थिति को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने बताया कि स्कूल में गंदे पानी का भराव, टूटी सड़कें, कीचड़ और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है बल्कि उनकी सेहत पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि छोटे बच्चे रोज जूते उतारकर और घुटनों तक पानी में चलकर स्कूल आने को मजबूर हैं, जो अत्यंत शर्मनाक है।

पुलिस ने रोका, स्कूल गेट के बाहर हुआ विरोध

प्रदर्शन कर रहे NSUI वॉलंटियर्स को स्कूल परिसर में घुसने से पुलिस ने रोक दिया, जिसके चलते छात्रों ने स्कूल गेट के बाहर ही धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर हालात नहीं सुधरे तो NSUI उग्र आंदोलन करेगा।

NSUI के सवाल: जब मॉडल स्कूल की ये हालत है, तो बाकी का क्या हाल होगा?

NSUI नेताओं ने कहा कि यह स्कूल राज्य सरकार की स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना के तहत “मॉडल स्कूल” की श्रेणी में आता है, लेकिन इसकी हालत देखकर पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का अनुमान लगाया जा सकता है। NSUI ने सवाल उठाया कि प्रदेश में अब तक शिक्षा मंत्री नियुक्त नहीं हुए हैं, ऐसे में बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

प्रशासन हरकत में, प्रदर्शन के बाद पहुंचे JCB और अधिकारी

प्रदर्शन शुरू होते ही PWD और नगर निगम के अधिकारी JCB मशीन लेकर स्कूल परिसर पहुंचे और जल निकासी का काम शुरू किया। NSUI ने इसे दबाव की जीत बताया और कहा कि जब तक छात्र संगठनों का दबाव नहीं पड़ता, तब तक प्रशासन आंखें नहीं खोलता।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद

इस विरोध प्रदर्शन में NSUI वाइस चेयरमैन पुनेश्वर लहरे, छाया पार्षद गावेश साहू, आलोक खरे, विनय साहू, हिमांशु तांडी, असलान शेख, समीर तिहारवंश, दुर्गेश साहू, अभिषेक परिहार समेत कई छात्र कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अगली चेतावनी: 5 दिन बाद उग्र आंदोलन

NSUI ने साफ किया है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो 5 दिन के भीतर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। संगठन ने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।


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